पूज्य राधिकाशरण महाराज के आशीर्वचनों से संस्कृत साधकों को मिली प्रेरणा, दैनिक व्यवहार में संस्कृत प्रयोग का लिया संकल्प।
थूर, उदयपुर। संस्कृतभारती द्वारा श्रीधाम आश्रम, थूर में 22 से 27 अक्टूबर 2026 तक आयोजित आवासीय संस्कृत सम्भाषण शिविर का समापन श्रद्धा, उत्साह एवं संस्कृतमय वातावरण में हुआ। आश्रम प्रमुख परमपूजनीय राधिकाशरण जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित समापन समारोह में महाराज श्री ने आशीर्वचन प्रदान करते हुए संस्कृत के महत्त्व, भारतीय संस्कृति में उसके स्थान तथा दैनिक जीवन में संस्कृत के प्रयोग की प्रेरणा दी ।
महानगर मंत्री नरेंद्र शर्मा ने बताया कि शिविर में विद्यार्थियों एवं संस्कृत अनुरागियों को प्रत्यक्ष विधि, संवाद, व्याकरण, गीत, नाट्य एवं भाषा-क्रीड़ा के माध्यम से संस्कृत बोलने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रातः एकात्मता स्तोत्र एवं पंचांग से प्रारम्भ होने वाली दिनचर्या से लेकर भोजन, खेल एवं आपसी वार्तालाप तक संस्कृत का प्रयोग किया गया। पोहे को ‘पृथुकम्’, खीर को ‘पायसम्’, जलेबी को ‘कुण्डलिका’ तथा पानी पूरी को ‘जलपूरिका’ जैसे शब्दों से संबोधित करते हुए प्रतिभागियों ने संस्कृत को दैनिक व्यवहार से जोड़ने का रोचक अनुभव प्राप्त किया।
शिविर में विस्तारक गौरव साहु एवं महानगर शिक्षण प्रमुख श्रीयांश कंसारा ने रुचिपूर्ण एवं खेल-आधारित पद्धति से प्रशिक्षण प्रदान किया। समापन समारोह में शिविरार्थी राघव, मयंक एवं वैदिक ने संस्कृत में अपने अनुभव साझा किए। वहीं मिताली, पारुल, ट्विंकल, भवानी, स्नेहलता एवं तनुजा ने संस्कृत में सामूहिक गीत प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध किया।
शिविर में लगभग 18 शिविरार्थियों सहित शिक्षक, गृहिणियां, उद्योगी वर्ग एवं संस्कृतप्रेमियों ने सहभागिता की। मध्यप्रदेश सहित विभिन्न स्थानों से आए प्रतिभागियों ने संस्कृत में संवाद का अभ्यास कर भाषा के प्रति अपना उत्साह एवं आत्मविश्वास प्रदर्शित किया।
इस आवासीय शिविर का प्रमुख उद्देश्य संस्कृत को केवल अध्ययन की भाषा न मानकर सामान्य जनजीवन की सहज बोलचाल की भाषा बनाना रहा। शिविर का समापन संस्कृत के निरंतर प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ हुआ।
