उदयपुर, 6 अगस्त। त्रिसुगंधी साहित्य, कला एवं संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में रविवार 9 अगस्त को अम्बामाता स्थित श्रृंगी ऋषि भवन में राष्ट्रीय अधिवेशन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में राजस्थान के 15 जिलों से साहित्यकार भाग लेंगे। साथ ही राजस्थान के प्रवासी साहित्यकारों की भी गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इस वर्ष सभी सम्मान राजस्थान के मूल निवासी साहित्यकारों एवं प्रवासी राजस्थानियों को प्रदान किए जाएंगे।
समारोह में कुल 17 साहित्य सम्मान प्रदान किए जाएंगे जिसमें 5100, 3100, 2100 तथा 1100 की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। इनमें बावजी चावण्ड सिंह राणावत ‘विद्रोही’ ओळ्यूं राजस्थानी भासा साहित्य-शिरोमणि सम्मान, महिमा आमेटा ओळ्यूं लोक भासा साहित्य शिखर सम्मान, कृष्ण शंकर जोशी स्मृति साहित्य विभूषण सम्मान, दुर्गा देवी स्मृति हिंदी साहित्य विभूषण सम्मान, एडवोकेट प्यारे लाल पारख स्मृति काव्य कला निधि सम्मान, रतनलाल शर्मा ‘सिखवाल’ अजमेर स्मृति काव्य-कथ्य गौरव सम्मान, राजकुमार गुप्ता स्मृति छंद-रत्न सम्मान (2025 एवं 2026), कृष्ण चंद्र ओझा ओसियाँ स्मृति बाल साहित्य-रत्न सम्मान, अशोक कुमार सक्सेना स्मृति भारतीय अध्यात्म दर्शन विभूषण सम्मान, हेमलता अग्रवाल स्मृति कथा-साहित्य गौरव सम्मान, हरि विमला स्मृति काव्य-रत्न सम्मान, सुश्री सुरभि स्मृति साहित्य-सौरभ सम्मान, मथुरादास पारख स्मृति युवा कथा-रत्न सम्मान, ज्ञानेश्वरी चैहान स्मृति युवा काव्य-श्री सम्मान, सुश्री गीता वर्मा स्मृति युवा रत्न लेखन सम्मान तथा झंकार कुंवर-सम्पतराज पोरवाल स्मृति ज्योतिर्मय शांति साहित्य सम्मान शामिल हैं।
कार्यक्रम में आठ पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा। इनमें ‘जिजीविषा’ (स्व. ज्ञानेश्वरी चैहान), ‘पपीहा मुँह खोलेगा’ (रमेश भटनागर), ‘शुभम सौंदर्य’ (देवीलाल जोशी), ‘मौन प्रस्थान – आत्मा के अनंत पदचिह्न’ (डॉ. मनीष सक्सेना), ‘बारिश में भीगे शब्द’ (चंद्रशेखर शर्मा), ‘तितली चली सिनेमा हॉल’ (आशा पाण्डेय ओझा ‘आशा’), ‘काव्य सरिता’ (डॉ. नम्रता जैन) तथा ‘आशाओं के पंख’ (सुनील चाष्टा) का विमोचन होगा।
राष्ट्रीय अधिवेशन के तीन प्रमुख विचार-सत्रों में बाल साहित्य, ‘वन्दे मातरम – राष्ट्रवाद, संस्कृति और संस्कार, तथा आदिवासी समाज और राष्ट्रवाद जैसे समकालीन एवं राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर विद्वानों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। यह आयोजन साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रचेतना और राजस्थानी अस्मिता के विविध आयामों को एक मंच पर प्रस्तुत करने वाला महत्त्वपूर्ण साहित्यिक महोत्सव होगा।
राष्ट्रीय अधिवेशन एवं सम्मान समारोह रविवार को
