उदयपुर। सलूम्बर जिले की सराड़ा तहसील के परसाद स्थित एक गांव के तीन नाम हैं। यह गांव सांगा बावजी है। गांव के मार्ग पर लगे मील के पत्थरों पर सांगा बावजी अंकित भले ही है, लेकिन ग्रामीण इस गांव को सांगा बावड़ी के नाम से पुकारते हैं। लेकिन, हैरान करने वाली एक बात और है कि इसी गांव में स्थित स्कूल पर गांव का नाम मेघात फला लिखा है जो किसी भी तरह से गांव के नाम से मेल नहीं खाता। इन तीन नामों के फेर से हैरान ग्रामीण इस गांव का मूल बोलचाल में प्रचलित नाम सांगा बावड़ी करना चाहते हैं। इसके लिए सभ्यता अध्ययन केन्द्र के राजस्थान चैप्टर ने सांसद डॉ. मन्नालाल रावत को आग्रह पत्र लिखा है। सभ्यता अध्ययन केन्द्र राजस्थान चैप्टर के संयोजक मनोज जोशी ने बताया कि परसाद से चावण्ड मार्ग पर खोड़ी महुड़ी से आगे आने वाले इस गांव में महाराणा सांगा ने बावड़ी बनवाई थी। इसकी ऐतिहासिक जानकारी एकत्र करने सभ्यता अध्ययन केन्द्र की टीम गुरुवार को गांव पहुंची। सभ्यता अध्ययन केन्द्र नई दिल्ली के सह निदेशक डॉ. विवेक भटनागर ने बताया कि जनश्रुतियों में महाराणा सांगा द्वारा बनाई गई बावड़ी के कारण गांव का नाम भी सांगा बावड़ी पड़ा, लेकिन कालांतर में कागजों में सांगा बावजी दर्ज कर दिया गया जबकि यहां ऐसा कोई देवरा या स्थानक नहीं है। वरिष्ठ पुरातत्वविद डॉ. जीवन सिंह खरकवाल ने बताया कि गांव में प्राचीन बसावट के अवशेष भी नजर आते हैं, हालांकि इसके लिए व्यवस्थित और गहन शोधकार्य की आवश्यकता है।
एक गांव के तीन नाम, सांसद से नाम सही करने का आग्रह
