उदयपुर, 03 जुलाई, 2026। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर द्वारा विश्वविद्यालय से सम्बद्धता (Affiliation) प्रदान करने की प्रक्रिया के अंतर्गत राजकीय कृषि महाविद्यालय, खेरवाड़ा (उदयपुर) एवं राजकीय कृषि महाविद्यालय, गोगुन्दा (उदयपुर) का स्थलीय निरीक्षण विश्वविद्यालय की त्रि-सदस्यीय निरीक्षण समिति द्वारा किया गया। समिति में डॉ. एल. एन. महावर, प्रोफेसर, उद्यानिकी विभाग, राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर (अध्यक्ष), डॉ. रमेश बाबू, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कीट विज्ञान विभाग (सदस्य) तथा डॉ. जी. एल. मीणा, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कृषि अर्थशास्त्र विभाग (सदस्य) शामिल थे।
निरीक्षण के दौरान समिति ने दोनों महाविद्यालयों की भौतिक अवसंरचना, शैक्षणिक व्यवस्थाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, कृषि भूमि, कक्षाओं, भवनों, उपकरणों, संकाय एवं अन्य मानव संसाधनों सहित विभिन्न आधारभूत सुविधाओं का विस्तृत एवं तथ्यात्मक मूल्यांकन किया। इसके अतिरिक्त आवश्यक अभिलेखों का सत्यापन, फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी भी नियमानुसार सम्पन्न की गई।
समिति के निरीक्षण में पाया गया कि राजकीय कृषि महाविद्यालय, खेरवाड़ा का महाविद्यालय भवन लगभग पूर्ण रूप से तैयार है तथा शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन हेतु आवश्यक अधिकांश आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध हैं। वहीं राजकीय कृषि महाविद्यालय, गोगुन्दा में भवन निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा कुछ संरचनात्मक कार्य अभी भी जारी हैं, जिनके पूर्ण होने के उपरांत महाविद्यालय की समस्त अधोसंरचनात्मक सुविधाएँ पूर्ण रूप से विकसित हो जाएँगी।
निरीक्षण के समय दोनों महाविद्यालयों में नियमित रूप से शिक्षण कार्य एवं परीक्षाओं का संचालन हो रहा था। समिति ने विभिन्न कक्षाओं का निरीक्षण कर विद्यार्थियों से संवाद भी किया। निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की उपस्थिति शत-प्रतिशत नहीं पाई गई, जबकि कक्षाओं में उपस्थित विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या छात्रों की अपेक्षा अधिक रही, जो उच्च शिक्षा में बालिकाओं की बढ़ती सहभागिता का सकारात्मक संकेत है। विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार समिति द्वारा निरीक्षण के दौरान संकलित समस्त तथ्यों, आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्यों, फोटोग्राफ एवं वीडियोग्राफी के आधार पर विस्तृत निरीक्षण प्रतिवेदन एवं अपनी अनुशंसाएँ तैयार कर संयोजक एवं निदेशक, आवासीय निर्देशन निदेशालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर को प्रस्तुत की जाएंगी।
विद्यार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में समिति ने सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर विशेष बल दिया। समिति के सदस्यों ने विद्यार्थियों से कहा कि वे भविष्य में कृषि स्नातक एवं कृषि विशेषज्ञ के रूप में किसानों को हरित खाद (Green Manuring) के अधिकाधिक उपयोग, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं न्यूनतम प्रयोग तथा जैविक एवं कार्बनिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जागरूक करें। समिति ने विद्यार्थियों को बताया कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं टिकाऊ कृषि विकास के लिए प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना वर्तमान समय की आवश्यकता है। साथ ही, किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के उपयोग तथा संसाधनों के वैज्ञानिक एवं विवेकपूर्ण प्रबंधन के प्रति भी प्रेरित करने का आह्वान किया गया।
निरीक्षण के दौरान डॉ. दिनेश हंस (अधिष्ठाता), डॉ. रेखा पंचाल (अधिष्ठाता), श्री राजीव शर्मा (नोडल अधिकारी), डॉ. जितेन्द्र कुमार, डॉ. महेन्द्र गोरा, डॉ. के. के. चन्देल, श्री विजेन्द्र, श्री मुकेश कुमार चौधरी, डॉ. अर्जुन सिंह राजपूत, डॉ. बीरेन्द्र, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. मुकेश कुमार यादव, डॉ. आशीष राजा जांगिड़, डॉ. सुरेन्द्र कुमार धायल, डॉ. नरेन्द्र चौधरी सहित विद्या संबल योजना के अंतर्गत कार्यरत अतिथि संकाय, अशैक्षणिक कार्मिक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने निरीक्षण समिति को आवश्यक अभिलेख, सूचनाएँ एवं अपेक्षित सहयोग प्रदान किया।
समिति ने महाविद्यालय प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई व्यवस्थाओं एवं सहयोग की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि दोनों महाविद्यालय विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित शैक्षणिक एवं अधोसंरचनात्मक मानकों की दिशा में निरंतर प्रगति करते हुए गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
