साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने कहाकृअप्रिय घटनाओं को भूलें, अच्छी बातों को जीवन में रखें
उदयपुर। वासुपूज्य मंदिर दादाबाड़ी में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 ने कहा कि परमात्मा त्रिपदी यानी तीन पदों के माध्यम से शक्तिशाली आध्यात्मिक पथ प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि दीक्षा से पहले व्यक्ति सामान्य होता है, लेकिन परमात्मा की कृपा प्राप्त होते ही उसका जीवन मूल्यवान बन जाता है।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि परमात्मा के हृदय से हर पल करुणा और दया बरसती है, लेकिन हमारी मन की गरीबी के कारण हम उस कृपा को प्राप्त नहीं कर पाते। उन्होंने समझाया कि जैसे मां दो पुत्रों में अस्वस्थ पुत्र की अधिक सेवा करती है, लेकिन स्वस्थ पुत्र के दीर्घायु होने की कामना करती है, उसी प्रकार परमात्मा आसक्त जीव के प्रति करुणा और वैरागी जीव के प्रति प्रेम बरसाते हैं।
उन्होंने कहा कि रंग-रूप केवल पुद्गल की व्यवस्था है। इसका आत्मा की योग्यता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यदि परमात्मा की कृपा प्राप्त करनी है तो हमें अपने पुरुषार्थ से आत्मा की योग्यता बढ़ानी होगी।
साध्वी श्रीजी ने कहा कि जब तक व्यक्ति को परमात्मा के शासन और आध्यात्मिक जीवन में रस नहीं आता, तब तक वह स्वाध्याय से दूर रहता है। जिस दिन आध्यात्मिक जीवन में रस जागेगा, उसी दिन वह स्वाध्याय की पुस्तकों का अध्ययन करने लगेगा।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को सुखी रहना है तो अप्रिय घटनाओं को भूलना और अच्छी बातों को याद रखना चाहिए। किसी के घर जाने पर यदि सत्कार न मिले तो वह घटना लंबे समय तक याद रहती है, क्योंकि मनुष्य अप्रिय बातों को आसानी से नहीं भूलता। इसलिए जीवन में सकारात्मक बातों को स्थान देना चाहिए। इस अवसर पर साध्वी प्रज्ञानजना श्रीजी, साध्वी नमन रुचि श्रीजी, साध्वी योगरुचि श्रीजी एवं साध्वी तन्मय रुचि श्रीजी ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया।
परमात्मा की कृपा चाहिए तो आत्मा की योग्यता बढ़ानी होगी
