भावों की विशुद्धि से ही जीवन का निर्माण संभवःडॉ. सुरेन्द्र मुनि

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर, 6 अगस्त। देवेन्द्रधाम में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन श्रृंखला में मुनिश्री डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि मनुष्य के जीवन का वास्तविक निर्माण उसके शुद्ध भावों से होता है। उन्होंने कहा कि शुभ भाव व्यक्ति को उत्कृष्ट बनाते हैं, जबकि अशुभ भाव जीवन को पतन की ओर ले जाते हैं।
मुनिश्री ने प्रवचन में कहा कि प्रत्येक कर्म का मूल कारण हमारे भाव हैं। मन, वचन और कर्म की पवित्रता से ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने बताया कि धर्म केवल बाहरी आचरण नहीं, बल्कि अंतर्मन की शुद्धि का मार्ग है। शुभ भावों के साथ किया गया प्रत्येक कार्य पुण्य का कारण बनता है और जीवन को सार्थक दिशा प्रदान करता है।
इस अवसर पर डॉ. राजेन्द्र मुनि ने धर्म के चार प्रमुख स्वरूपों में दान की महत्ता बताते हुए कहा कि दान तभी सफल और सार्थक होता है, जब उसमें अहंकार या स्वार्थ का भाव न हो। निष्काम भाव से किया गया दान आत्मकल्याण और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
प्रवचन में राजा प्रसन्नचंद्र के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया गया कि मनुष्य के भावों में परिवर्तन से उसके कर्मों की दिशा भी बदल जाती है। शुभ चिंतन, तप, साधना और आत्मसंयम से व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।इस अवसर पर उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि द्वारा मंगल भावना व्यक्त की गयी.
कार्यक्रम के अंत में समाज के पदाधिकारियों ने नाथद्वारा से आये अम्बालाल लोढ़ा एवं अन्य आगंतुक महानुभावों का स्वागत किया गया तथा धार्मिक एवं सामाजिक साधना के लिए प्रेरणा प्रदान की।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!