‘‘ मानवता के लिए योग ’’ विषय पर
एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन
योग के माध्यम से मानवता का विकास संभव – प्रो. सारंगदेवोत
उदयपुर 06 जून/ जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ ( डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय ) की ओर से प्रतापनगर नगर स्थित कुलपति सचिवालय के सभागार में ‘‘ मानवता के लिए योग ’’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य वक्ता जय नारायण व्याय विवि जोधपुर के पूर्व आचार्य प्रो. सी.एस. भाटी ने कहा कि योग मानवता और व्यक्ति की उन्नति में मदद करता है। आज का दौर प्रतियोगिता का है, प्रतियोगिता जीवन के प्रारंभ से शुरू होती है और अंत तक चलती है। योग एवं अष्टांग योग के माध्यम से आदर्श व्यक्ति का निर्माण कर सकते है, जिससे अच्छे समाज का भी निर्माण होगा। योग और प्रणायाम के माध्यम से जीवन मे आगे बढंेगे तो कभी असफल नहीं होगे।
संगोष्ठी का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्जवलित कर किया।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि कोविड 19 के दौरान योग ने सभी के कष्टों को दूर करने में मानवता की सेवा की। मनुष्य अपनी दैनिक दिनचर्या में योग को शामिल करेगा तो वह अस्वस्थ नहीं रहेगा। कोविड के समय भी जिनकी इम्युनिटी पॉवर अच्छी थी कोरोना का उन पर कोई असर नहीं हुआ। योग कई बिमारियों से बचाव के साथ-साथ, शारीरिक उर्जा बढ़ाने, तनाव केा कम करने में मदद करता है। योग मनुष्य को स्वस्थ रहने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि भारतीय, संस्कृति और सभ्यता की बात करते हैं तो इसे बनाने में हमारे पूर्वजों ने अपने आप को न्यौछावार कर दिया लेकिन पिछले 50 वर्षों में हम सभी ने इसका दोहन करते रहे और इसी का परिणाम है कि आज मई-जून के महीनें में भी बारिश आ रही है हमारा पूरा इको सिस्टम ही बिगड़ गया है। योग के माध्यम से मानवता का विकास करे, मानवता के माध्यम से पर्यावरण का संरक्षण करे।
विषयप्रवर्तन पर अपनी बात रखते हुए योग गुरू डॉ. धीरज प्रकाश जोशी ने योग से किस प्रकार से मानवता की रक्षा की जा सकती है पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यम एवं नियमों का पालन कर पर्यावरण एवं मानवता की रक्षा कर सकते हैं। जब एक व्यक्ति मानवता से ओतप्रोत होता है तो वह समाज के साथ अन्य प्राणियों की भी रक्षा करता है । हम उस संस्कृति से हैं जहॉ वृक्षोें की पूजा की जाती है। डॉ. जोशी ने योग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की।
संचालन डॉ. दिलीप सिंह चौहान ने किया जबकि आभार डॉ. रोहित कुमावत ने दिया।
संगोष्ठी में पूर्व निदेशक प्रो. भुपेन्द्र सिंह राठौड़, पूर्व बार अध्यक्ष डॉ. प्रवीण खण्डेलवाल, महेन्द्र नागदा, रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, परीक्षा नियंत्रक डॉ. पारस जैन, डॉ. हीना खान, डॉ. नीरू राठौड, डॉ. शिल्पा कंठालिया, डॉ. दिलिप सिंह चौहान, डॉ. संतोष लाम्बा, भगवती लाल सोनी, डॉ. लाला राम जाट, डॉ. भारत सिंह देवडा, डॉ. मनीष श्रीमाली, डॉ. चन्द्रेश छतलानी, डॉ. प्रदीप सिंह शक्तावत, चितरंजन नागदा, डॉ. सीता गुर्जर, डॉ. दिनेश श्रीमाली, डॉ. एसबी नागर, डॉ. भूरालाल श्रीमाली, डॉ. प्रेरणा भाटी, डॉ. जयसिंह जोधा, डॉ. ललित सालवी, डॉ. धिरेन्द्र सिंह, मोहन गुर्जर सहित विद्यापीठ के डीन डायरेक्टर उपस्थित थे।
