उदयपुर। महावीर समवशरण में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने श्रद्धालुओं को इच्छाओं पर विजय पाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जीवन में जो कुछ भी प्राप्त हुआ है अथवा हो रहा है, उसे पर्याप्त मानने वाला व्यक्ति ही सदा सुखी और संपन्न रह सकता है; अन्यथा आशा और अंतहीन इच्छाओं के फेर में इंसान हमेशा दुखी व तनावग्रस्त बना रहता है।
उन्होंने आगे कहा कि आज अधिकांश लोगों की समस्या पेट भरने की नहीं, बल्कि पेटी भरने की रह गई है। दो-चार नहीं, बल्कि हजारों पेटियां भरने के बाद भी व्यक्ति को कम ही लगता है और वह इसे कम आय मानता है, जबकि मन कभी संतुष्ट होने को तैयार नहीं होता। हमें हर उस वस्तु के निर्माता के प्रति उपकारी भावना रखनी चाहिए चाहे वह अन्न उगाने वाला किसान हो, कपड़ा बनाने वाला मजदूर हो, वाहन चालक हो या घर के कार्यों में हाथ बंटाने वाला सेवक।
धर्मसभा में प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पहले सुविधाएं सीमित थीं, किंतु संतोष अधिक था। जीवन की वास्तविक खुशियां बाहरी भौतिक साधनों में नहीं, अपितु आंतरिक संतुष्टि में निहित हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अन्न, पानी और हवा प्रकृति की अनमोल देन हैं; यदि इनमें कोई रुकावट आ जाए तो जीवन ही दुर्लभ हो जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति में जो अलौकिक शक्ति है, वह किसी भी बाहरी साधन से प्राप्त नहीं की जा सकती। सच्चा सुख वही है जो किसी अन्य पर आश्रित न होकर स्वयं के भीतर से उत्पन्न होता है, क्योंकि दूसरों से प्राप्त सुख सदा अधूरा ही रहता है।
कार्यक्रम के दौरान उपाध्याय रमेश मुनि एवं दीपेश मुनि द्वारा मंगल गान प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर सूरत, दिल्ली और गाजियाबाद से पधारे आगंतुक समाजसेवियों का हार्दिक स्वागत किया गया। इसके अतिरिक्त युवाचार्य महेन्द्र जयंती के उपलक्ष्य में श्राविका संघ तथा मुनिजनों द्वारा उनका गुणानुवाद प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में मंत्री हिम्मत बडाला ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिसके पश्चात प्रभावना (प्रसाद) वितरण के साथ सभा का समापन हुआ।
‘जो प्राप्त है उसे पर्याप्त समझें’: उदयपुर में बोले डॉ. राजेन्द्र मुनि व डॉ. सुरेन्द्र मुनि
