होली: रंगों से आगे, सोच का इम्तिहान
होली पर हिंदी विचार लेख | समाज, नैतिकता और जिम्मेदारी होली केवल रंगों का पर्व नहीं होली पर यह हिंदी विचार लेख केवल रंगों और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, सोच और जिम्मेदारी के उस इम्तिहान की बात करता है, जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं। सवाल यह नहीं है कि हमने कितने रंग उड़ाए, सवाल यह है कि क्या हमने अपने भीतर जमी डर, भ्रष्टाचार, बुरी नियत और अज्ञान की परतों को भी जलाया? होली और होलिका दहन का प्रतीकात्मक अर्थ होली हर साल आती है। गलियाँ गुलाल से भर जाती हैं, चेहरे मुस्कानों से रंग…
