“वन है तो कल है”
1 मार्च वन दिवस के उपलक्ष्य में "विशेष लेख " जमीन का अपना धर्म है -वह शील संयम और स्नेह के द्वारा माता की तरह हमारा पोषण करती है। इंसान इसी मिट्टी की उपज है ,इसी से पोषण पाता है और इसी मिट्टी में मिल जाता है। मिट्टी की साख को बचाने के लिए उपाय करना बहुत ज्यादा जरूरी है। मिट्टी को थामने के लिए पेड़ों की आवश्यकता होती है ,पेड़ होगे तो बाढ़ या तूफान से उपजाऊ मिट्टी बहकर या उड़कर इधर-उधर नही जा सकेगी। फिर जब अमृत वर्षा होगी तो धरती की कोख सोना उगलेंगी। वनों की जगह…
