सांसारिक जीवन के आचरणों के बीच भगवान का भी सानिध्य बनाए रखें- महर्षि उत्तम स्वामी
निम्बाहेड़ा। जीवन में प्रेम शरीर से होता है इसलिए जीवन में विभिन्न शरीरों के साथ प्रेम का परिवर्तन होता रहता है। जगत का शारीरिक सौन्दर्य कुछ समय के लिए आकर्षित कर सकता है, किन्तु सौन्दर्य चिरकाल नहीं होता है, जबकि आत्मा बहुत सुन्दर है, जिसने आत्मा के दर्शन कर लिए उसे जगत की कोई वस्तु आकर्षित नहीं कर सकती है। आत्म दर्शन से परमात्मा के दर्शन होते है। उक्त उद्गार मंगलवार को उपखण्ड़ के मण्डावली ग्राम में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन राजराजेश्वरी पदमावति शक्तिपीठ बांसवाड़ा के संस्थापक एवं ध्यानयोगी महर्षि उत्तम स्वामी जी महाराज ने…
