भजन व भोजन दोनों का संतुलन जरूरीःडॉ. सुरेन्द्र मुनि

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में भक्तामर अनुष्ठान के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि यह मानव शरीर केवल भोजन के लिए ही नहीं मिला है। इस अनमोल शरीर में कई अनमोल तत्व समाहित हैं। यदि इनका सही उपयोग कर लिया जाए, तो अनंत शक्तियां जागृत हो सकती हैं।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों, धर्मगुरुओं और समाजसेवियों ने अपने-अपने क्षेत्र में अथक पुरुषार्थ कर समाज को नई दिशा दी है। हमें भी प्राप्त शक्तियों व तत्वों का सदुपयोग करना चाहिए, लेकिन अक्सर लोग जीवन को केवल खाने-पीने तक ही सीमित कर देते हैं। मुनिश्री ने कहा कि सात्विक भोजन से भजन और भक्ति की भावना जागृत होती है, जबकि तामसिक आहार आत्मिक विकास में अवरोध पैदा करता है। भोजन के लिए चार चरणोंकृउगाना, पकाना, चबाना और पचानाकृपर ध्यान देना बेहद जरूरी है। स्वस्थ जीवन का सूत्र देते हुए उन्होंने कहा कि यदि पांव गर्म, पेट नरम और मस्तिष्क ठंडा रहे, तो बीमारियां कोसों दूर रहेंगी। चढ़ने-उतरने और चलने-फिरने के लिए पैरों का उपयोग करें; 24 घंटे लगातार चलने वाले हृदय के स्वस्थ संचालन के लिए प्रतिदिन कम से कम 24 मिनट चलना अनिवार्य है।
धर्मसभा में धार्मिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भजन की महत्ता बताते हुए प्रवर्तक डॉ. राजेंद्र मुनि ने कहा कि प्रभु भक्ति से हिंसा, झूठ, चोरी व क्रोध जैसे दुर्गुण समाप्त होते हैं। इससे संघ, समाज और परिवार में भाईचारे व परोपकार की भावना जागृत होती है तथा मानवता का संचार होता है। वर्तमान समय में इसका अभाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि प्रभु भक्ति के बिना कोई भी दिन या रात व्यर्थ नहीं जानी चाहिए; धर्म बिना जीवन निरर्थक है।
श्रीासंघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन एवं महामंत्री हिम्मत बडाला ने बताया कि सामूहिक भक्तामर अनुष्ठान का समापन समारोह 3 नवंबर को मीना महेंद्र तलेसरा परिवार एवं श्रावक संघ के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!