उदयपुर, 3 अगस्त। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी, पूर्व मंडल अध्यक्ष ओमप्रकाश खोखावत, पूर्व पार्षद दिनेश गुप्ता एवं डॉ. विजय विप्लवी ने संयुक्त वक्तव्य जारी कर श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को गुलाबबाग में आयोजित होने वाले पारंपरिक ‘सुखिया सोमवार मेले’ के आयोजन में सफाई व्यवस्था के नाम पर कतिपय अधिकारियों द्वारा बाधा उत्पन्न करने तथा मेला रोकने के प्रयासों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मेले का विषय नहीं, बल्कि उदयपुर की रियासतकाल से चली आ रही सामाजिक, सांस्कृतिक एवं लोक परंपरा के संरक्षण का प्रश्न है।
नेताओं ने कहा कि सुखिया सोमवार मेवाड़ की विशिष्ट लोक-सांस्कृतिक परंपरा है। श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को शहर और आसपास के क्षेत्रों से लोग बाग-बगीचों में जाते थे। महिलाएं एवं युवतियां सखियों के साथ झूले झूलतीं, लोकगीत गातीं और व्रत-उपवास के धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सामूहिक आनंद मनाती थीं। ऐतिहासिक विवरणों में सज्जन निवास बाग में इन अवसरों पर विशाल मेले, बाजार, झूले और डोलर लगाए जाने का उल्लेख मिलता है।
उन्होंने कहा कि समय के साथ इस परंपरा ने अपना स्वरूप बदला है, लेकिन गुलाबबाग में सुखिया सोमवार का मेला आज भी उदयपुर की सांस्कृतिक स्मृति और जनजीवन से जुड़ा हुआ है। मेले में शहर ही नहीं, आसपास के गांवों और कस्बों से भी लोग आते हैं। खान-पान, खिलौने, घरेलू सामान एवं अन्य वस्तुओं की दुकानें सजती हैं तथा झूले और मनोरंजन के साधन बच्चों, महिलाओं और परिवारों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं।
इन नेताओं ने कहा कि अधिकारियों द्वारा सफाई व्यवस्था के नाम पर मेला रोकने का प्रयास समझ से परे है। यदि सफाई व्यवस्था में कोई कमी है तो उसका समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। सफाई, यातायात, सुरक्षा, पार्किंग, कचरा निस्तारण और भीड़ प्रबंधन की समुचित व्यवस्था करके मेले को व्यवस्थित ढंग से आयोजित किया जाना चाहिए, न कि व्यवस्था संबंधी कमियों का ठीकरा मेले और आम जनता पर फोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि गुलाबबाग में अनियोजित निर्माण कार्यों के कारण प्राकृतिक जलमार्ग और कमल तलाई जैसी प्राकृतिक संरचनाओं को हुए नुकसान की ओर जिन अधिकारियों ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, वे अब सफाई व्यवस्था को लेकर इतने चिंतित क्यों हैं?
इन नेताओं ने कहा कि गुलाबबाग के विकास एवं निर्माण कार्यों के नाम पर पेड़ों को हटाने तथा प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ करने वाले अधिकारी यदि आज सफाई के नाम पर पारंपरिक मेले को रोकने का प्रयास करते हैं तो यह अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी से बचने का प्रयास प्रतीत होता है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि मेले को रोकने के बजाय पूर्व नियोजन के साथ सफाई, पेयजल, अस्थायी शौचालय, कचरा संग्रहण, विद्युत सुरक्षा, यातायात एवं पार्किंग तथा कानून-व्यवस्था की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मेला समाप्त होने के तत्काल बाद सफाई के लिए विशेष दल तैनात किया जाए और गुलाबबाग की स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि उदयपुर अपनी झीलों, बाग-बगीचों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के कारण विश्वभर में विशिष्ट पहचान रखता है। ऐसी जीवंत लोक परंपराओं को प्रशासनिक सुविधा के नाम पर समाप्त करने के बजाय उनका संरक्षण और व्यवस्थित संचालन किया जाना चाहिए।
इन नेताओं ने स्पष्ट कहा कि सुखिया सोमवार मेला केवल दुकानें और झूले लगाने का आयोजन नहीं है, यह मेवाड़ की लोक-संस्कृति, महिलाओं की सामूहिक भागीदारी, पारिवारिक मेल-मिलाप और उदयपुर की ऐतिहासिक जीवनशैली से जुड़ी परंपरा है। इसलिए प्रशासन को इसे बाधित करने के बजाय गरिमा एवं सुव्यवस्था के साथ आयोजित कराने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
