साहित्यकार डॉ. कुन्दन माली के साहित्यिक अवदान पर केन्द्रित पुस्तक ‘निज के भीतर निज से इतर’ का भव्य लोकार्पण

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वक्ताओं ने कहा — डॉ. कुन्दन माली का साहित्य मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज

उदयपुर, 2 अगस्त। केंद्रीय साहित्य अकादमी नई दिल्ली के राजस्थानी के सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित शहर के वरिष्ठ साहित्यकार, आलोचक, कवि एवं अनुवादक डॉ. कुन्दन माली के व्यक्तित्व एवं बहुआयामी साहित्यिक अवदान पर केन्द्रित पुस्तक ‘निज के भीतर निज से इतर’ का लोकार्पण समारोह रविवार को श्री गणेश गेस्ट हाउस सभागार में गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने पुस्तक का लोकार्पण करते हुए डॉ. माली के साहित्यिक योगदान को हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्य की अमूल्य धरोहर बताया।

टीम संस्था के तत्वावधान में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि जयपुर से आए प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सत्यनारायण ने कहा कि डॉ. कुन्दन माली का साहित्य मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और जीवन मूल्यों का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि डॉ. माली ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य को समाज से जोड़ते हुए नई वैचारिक दृष्टि प्रदान की है। विशिष्ट अतिथि श्रीनाथद्वारा के माधव नागदा ने कुंदन माली के साथ अपनी मुलाकातों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि डॉ. कुन्दन माली के आलोचनात्मक लेखन ने साहित्य को नई दिशा और गंभीर वैचारिक आधार प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. माली का रचना संसार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। वरिष्ठ साहित्यकार बीकानेर के नीरज दइया ने कहा कि डॉ. माली का व्यक्तित्व जितना सहज है, उनका साहित्य उतना ही गहन और व्यापक है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक डॉ. माली के व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने का महत्वपूर्ण दस्तावेज सिद्ध होगी।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. माधोसिंह इन्दा ने  कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण नहीं, बल्कि उसकी दिशा भी निर्धारित करता है। डॉ. माली के साथ बिताए अपने समय को याद करते हुए इन्दा ने कहा कि उनका लेखन जीवन, समाज और संस्कृति के गहरे सरोकारों को अभिव्यक्त करता है तथा नई पीढ़ी को गंभीर साहित्य सृजन की प्रेरणा देता है। मुख्य वक्ता डॉ. मंजु चतुर्वेदी ने डॉ. माली की साहित्यिक यात्रा, आलोचना-दृष्टि, रचनात्मक प्रतिबद्धता तथा हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्य में उनके उल्लेखनीय योगदान का विश्लेषण प्रस्तुत किया। डॉ. मदन गोपाल लड्डा ने पुस्तक की विषयवस्तु पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसे साहित्य जगत की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

पुस्तक के संपादक मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय राजस्थानी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश सालवी ने पुस्तक की परिकल्पना, संपादन प्रक्रिया तथा विभिन्न विद्वानों के सहयोग की जानकारी देते हुए कहा कि यह ग्रंथ डॉ. कुन्दन माली के समग्र साहित्यिक अवदान को एक स्थान पर प्रस्तुत करने का विनम्र प्रयास है। प्रारंभ में टीम संस्था के सचिव सुनील टांक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा अंत में सभी आगंतुकों, साहित्यकारों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का प्रभावी संचालन गौरीकान्त शर्मा ने किया। इस अवसर पर पुस्तक के प्रकाशक अंकुर प्रकाशन के राजेंद्र पानेरी का सम्मान किया गया जिन्होने अल्प समय में उम्दा पुस्तक प्रकाशित की। समारोह में डॉ सत्यनारायण, डॉ माधो सिंह इन्दा, माधव नागदा, डॉ नीरज दईया, डॉ मदन गोपाल लढ़ा, डॉ मंजू चतुर्वेदी के अलावा एल पी बुनकर, ए बी पंडा, श्रीकृष्ण जुगनू, प्रो जीएस राठौड़, मधु अग्रवाल, डॉ कुंजन आचार्य, राजेश मेहता, डॉ हुसैनी बोहरा, डॉ शारदा पोटा, शैली श्रीवास्तव, शैलेन्द्र शर्मा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकार, शिक्षाविद, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

केंद्रीय अकादमी से सम्मानित माली को मिल चुके कई पुरस्कार-सम्मान

डॉ. कुन्दन माली को केंद्रीय साहित्य अकादमी का सर्वोच्च राजस्थानी साहित्य पुरस्कार के अतिरिक्त राजस्थान साहित्य अकादमी तथा राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वे गुजरात विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुए, लेकिन हिन्दी और राजस्थानी दोनों भाषाओं में समान अधिकार के साथ उत्कृष्ट लेखन कर उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। आलोचना, कविता, अनुवाद और संपादन के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘मधुमति’ के आलोचना विशेषांक के संपादन सहित अनेक महत्वपूर्ण संपादकीय दायित्वों का सफल निर्वहन किया तथा अनुवाद के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है।

By Udaipurviews

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