कृषि की नवीन प्रविधियों पर दी जानकारी
उदयपुर, 2 जुलाई। युवा किसानों को कृषि की नवीन उन्नत प्रविधियों के रूबरू करवाने के उद्देश्य से ग्रामीण मदद काशी फाउंडेशन एवं अमृतांजली आयुर्वेद कंपनी द्वारा किसानों के लिए कृषि पाठशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला ऑनलाइन एवं ऑफ़लाइन दोनों रखी गयी जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया।
कृषि पाठशाला में ग्रामीण मदद काशी फाउंडेशन की संस्थापिका सरोज पटेल ने युवा किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आज के युवा नई तकनीकी की खेती करना चाहते है, आज के समय को देखते खेती में बदलाव चाहते है, पारंपरिक खेती से आधुनिक खेती की ओऱ कदम बढ़ाना चाहते है, यह अच्छी बात है। इस दिशा में यह कृषि पाठशाला उपयोगी साबित होगी। उन्होंने कृषि पाठशाला में जैविक खेती की जरूरत बताई और आज के दूषित वातावरण को देखते हुए औऱ लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए, किस प्रकार पेस्टिसाइड के उपयोग से हमारी जमीन बंजर होती जा रही है आदि की जानकारी दी। सरोज पटेल ने बताया कि नौजवानां और कृषि क्षेत्र के बीच इस अन्तर को मिटाने की पहल “ग्रामीण मदद काशी फाउंडेशन“ कर रही है।
इस दौरान कृषि विषेशज्ञ संदीप पाटीदार ने औषधीय, सुगन्धित फसलों तथा हर्बल औद्योगिक इकाई की सम्पूर्ण जानकारी दी । इसके साथ ही मिट्टी व पानी के सैंपल की जाँच की जानकारी के साथ प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने व प्रोजेक्ट की तकनीकी जानकारी, उच्चतम क्वालिटी के पौधे व बीज उपलब्ध कराने और इकाइयों हेतु रॉ मटेरियल की जानकारी भी युवा किसानों को दी गयी। पाठशाला में औषधीय, सुगंधित फसलां का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया गया साथ ही तैयार फसल का लेबोरेट्री टेस्ट, औषधीय गुण तथा गुणवत्ता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गयी। रबी/खरीफ की फसलों की नई तकनीक से खेती करना उसमे जैविक खाद उपयोग करना एवं अधिकृत एजेंसी से जमीन को ऑर्गेनिक सर्टिफाइड करने की जानकारी दी गयी।
इस मौके पर डॉ दिग्विजय सिंह राठौड़ ने जैविक खेती प्रमाणन प्रक्रिया के सर्टिफिकेट की प्रक्रिया की जानकारी दी, साथ ही बीजों के भंडारण की जानकारी दी गयी । पाठशाला दौरान सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट, औषधीय फसलों के बीजों का किट एवं काली हल्दी के पौधे उपहार स्वरूप दिए। इस मौके पर ज्योति नरानिया, रैना रेगर भी मौजूद रही।
उदयपुर में हुई युवा किसानों की ‘कृषि पाठशाला
