हार्टफुलनेस मेडिटेशन के माध्यम से तनाव प्रबंधन, जनसेवा एवं युवा प्रेरणा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
उदयपुर,8 मई। जयभद्र फाउंडेशन संस्थान नई दिल्ली द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी मुकेश कुमार को तीसरे कर्मयोगी सम्मान समारोह में ‘राष्ट्रीय कर्मयोगी अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान नई दिल्ली के इंडिया हेबिटेट सेंटर में आयोजित गरिमामयी समारोह में प्रदान किया गया। इस समारोह में देशभर के प्रशासन, सामाजिक सेवा, चिकित्सा, वित्तीय एवं आध्यात्मिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया।
समारोह में लगभग पचास से अधिक आईएएस, आईपीएस, आइआरएस अधिकारियों के साथ चिकित्सा विशेषज्ञों, वित्तीय क्षेत्र के अधिकारियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
वर्तमान में राजस्थान के माननीय राज्यपाल के उप सचिव के रूप में कार्यरत मुकेश कुमार पूर्व में चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जोधपुर सहित विभिन्न जिलों एवं विभागों में अतिरिक्त जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी तथा अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर सक्रिय रहे हैं।
मुकेश कुमार अंतराष्ट्रीय संस्थान हार्टफुलनेस मेडिटेशन के सर्टिफाइड ट्रेनर एवं जोनल कोऑर्डिनेटर भी हैं। वे नि:शुल्क रूप से सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच तनाव प्रबंधन, मानसिक संतुलन और सकारात्मक कार्यसंस्कृति को बढ़ावा देने हेतु ध्यान आधारित सेशन आयोजित करते रहे हैं। उनके इन प्रयासों से अनेक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।
इसके साथ ही वे युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं एवं अन्य प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करने, व्यक्तित्व विकास तथा आत्मविश्वास निर्माण के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ध्यान, आध्यात्मिक जागरूकता और आंतरिक संतुलन के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने की उनकी पहल को व्यापक सराहना मिल रही है।
समारोह में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि वर्तमान समय में तनावपूर्ण जीवनशैली के बीच ध्यान और मानसिक संतुलन की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है, और इस दिशा में मुकेश कुमार का योगदान प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय है।
यह सम्मान उनके प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ समाज और मानव कल्याण के प्रति उनकी सतत प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।
