विद्यापीठ – तनाव प्रबंधन पर विशेष सेमीनार का हुआ आयोजन
जिसे सहना आ गया, उसे जीना आ गया – जैन गुरू डॉ. अरविंद मुनि
मेडिटेशन एवं आध्यात्म से हर तनाव को दूर किया जा सकता है …………
उदयपुर 09 अप्रेल। वर्तमान समय की भागदौड़ भरी जीवनशैली में बढ़ता तनाव मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में मानसिक संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। मेडिटेशन एवं अध्यात्म से जीवन के हर तनाव को दूर किया जा सकता है। आज व्यक्ति हंसना भूल गया है।
यह विचार राजस्थान विद्यापीठ के संघटक एग्रीकल्चर महाविद्यालय के सभागार में आयोजित एक दिवसीय विशेष सत्र में जैन गुरू आचार्य डॉ. अरविंद मुनि ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को तनाव प्रबंधन के उपाय बताते हुए व्यक्त किए। मुनि ने कहा कि ईश्वर ने मनुष्य को सुंदर बनाया है लेकिन तनाव के कारण व्यक्ति स्वयं अपने व्यक्तित्व को बिगाड लेता है। तनाव का मूल कारण मन की चंचलता है जिससे अनेक प्रकार के मानसिक विकास उत्पन्न होते है। उन्होंने माता पिता को ईश्वर का दर्जा देने, नियमित पूजा पाठ और मेडिटेशन को जीवन का सकारात्मक आधार बताया।
उन्होंने कहा कियदि व्यक्ति अपनी दिनचर्या में सकारात्मक सोच, योग, ध्यान और समय प्रबंधन को शामिल कर ले, तो तनाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तनाव जीवन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे अपने ऊपर हावी होने देना हमारी कमजोरी है। सही सोच और संतुलित जीवनशैली से हर व्यक्ति तनाव को ऊर्जा में बदल सकता है। डॉ. अरविंद मुनि ने युवाओं को विशेष रूप से संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया और अनावश्यक तुलना भी तनाव का बड़ा कारण बनती जा रही है। उन्होंने युवाओं को अपनी क्षमता पहचानने और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
डॉ. मुनि ने बताया कि नियमित योग, प्राणायाम, ध्यान और प्रकृति के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है। इसके साथ ही परिवार और मित्रों के साथ संवाद बनाए रखना भी तनाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों और युवाओं के सामने कई प्रकार की चुनौतियां हैं, जिनसे तनाव उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान देने का माध्यम ही नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सकारात्मक बनाने का भी मार्ग है। पर्यावरण, योग, ध्यान और सकारात्मक चिंतन को अपनाकर ही हम स्वस्थ और तनावमुक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं। हमें अपने मन, शरीर और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना सीखना होगा।
प्रारंभ में प्रो. आईजे माथुर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सेमीनार की जानकारी दी। संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया जबकि आभार डॉ. गजेन्द्र माथुर ने जताया। इस मौके पर प्रो. सुनिता मुर्डिया, प्रो. अमी राठौड, डॉ. लीली जैन, डॉ. एजाज सहित बड़ी संख्यॉ में विद्यार्थी उपस्थित थे।
