अब आपकी हर डिजिटल गतिविधि पर विभाग की नजर, एआई और डेटा एनालिटिक्स बनी आयकर-जीएसटी विभाग की ‘तीसरी आंख’

आयकर और जीएसटी विभाग की डिजिटल निगरानी प्रणाली

उदयपुर। डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (।प्) और आधुनिक डेटा एनालिटिक्स ने कर प्रशासन की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल दिया है। अब सोशल मीडिया पोस्ट, बैंकिंग ट्रांजैक्शन, हाई-वैल्यू खरीदारी और ऑनलाइन गतिविधियों के माध्यम से करदाता और व्यापारियों की हर छोटी-बडी जानकारी सीधे विभाग की निगरानी में है। इसी विषय को केंद्र में रखते हुए उदयपुर टेक्स बार एसोसिएश द्वारा प्लेटिनम जुबली वर्ष के तहत एक विशेष स्टडी सर्कल मीटिंग का आयोजन किया गया, जिसमें कर विशेषज्ञों ने नए आयकर कानूनों, जीएसटी प्रावधानों और एआई आधारित निगरानी प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सीए दीपक एरन ने बताया कि कार्यक्रम के प्रथम सत्र में जयपुर के प्रसिद्ध कर अधिवक्ता पंकज घीया ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि अब वह दौर समाप्त हो चुका है जब करदाता विभाग की नजरों से बच सकते थे। उन्होंने कहा कि एक ओर एआई व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के कार्य को सरल बना रहा है, वहीं दूसरी ओर आयकर और जीएसटी विभाग भी “प्रोजेक्ट इनसाइट” जैसी तकनीकों के माध्यम से राजस्व चोरी पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
एडवोकेट घीया ने जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा में अपील दायर नहीं की जाती, तो देरी की माफी केवल उच्च न्यायालय द्वारा ही संभव होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जीएसटी विभाग एक बार शो कॉज नोटिस जारी करने के बाद उन्हीं बिंदुओं तक सीमित रहता है, जो नोटिस में उल्लिखित किए गए हों। प्रथम सत्र की अध्यक्षता सीए केशव मालू ने की।
एसोसिएशन के सचिव सीए हातिम कांकरोलीवाला ने बताया कि दूसरे सत्र में जयपुर के वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव सोगानी ने 1 अप्रैल से लागू नए आयकर अधिनियम-2025 के विभिन्न प्रावधानों और बदलावों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने भले ही नए अधिनियम को सरल भाषा और सुविधाजनक प्रारूप में प्रस्तुत करने का दावा किया हो, लेकिन इसके भीतर कई तकनीकी और महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं, जिन पर कर पेशेवरों को गंभीरता से ध्यान देना होगा।
सीए सोगानी ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य अब राजस्व संग्रह को बढ़ाना है, इसलिए विवादों को कम करने के लिए अपडेटेड रिटर्न्स सहित कई सुधारात्मक विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने प्रोफेशनल्स को सलाह दी कि एआई भविष्य का महत्वपूर्ण उपकरण अवश्य है, लेकिन व्यक्तिगत कौशल और व्यावसायिक समझ ही सफलता की वास्तविक कुंजी है। इस सत्र की अध्यक्षता सीए (डॉ.) निर्मल कुणावत ने की।
कार्यक्रम में एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सीए अरुण रत्नावत, कोषाध्यक्ष सीए अंकित जैन,उदयपुर टेक्स बार चेरिटेबल सोसायटी के अध्यक्ष एडवोकेट दीपक प्रजापत, सचिव महेश मंडोवरा, कार्यकारिणी सदस्य सीए पंकज नेवटिया, सीए गिरीश बोहरा, राजेश देवपुरा सहित शहर के अनेक वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, टैक्स एडवोकेट्स और कर विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कर कानूनों में हो रहे बदलावों और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को लेकर गहन चर्चा की।

By Udaipurviews

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