श्रमिको को स्कील, रीस्कील, क्रोसस्कीलिंग करने की जरूरत – प्रो. सारंगदेवोत

क्षेत्रीय सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न
श्रमिकों के कल्याण के लिए जारी केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं के प्रति करें जागरूक

उदयपुर 24 मार्च / दत्तोपंत ठेंगड़ी राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशालय उदयपुर के क्षेत्रीय सलाहकार समिति की बैठक मंगलवार को राजस्थान विद्यापीठ विवि के कुलपति सचिवालय के सभागार में  सम्पन्न हुई।
प्रारंभ में पदेन सचिव व क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारी जगदीप सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए वर्ष 2025-26 का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। सिंह ने कहा कि पूर्व में लिये गये सभी निर्णयों की क्रियांविति हो चुकी है।
क्षेत्रीय निदेशक पुनीत गौतम ने बोर्ड की ओर से श्रमिकों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जागरूकता शिविरों और गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा  कि शिक्षा व्यक्ति को बडा बनाती है और स्कील व्यक्ति की कीमत बढाती है आधुनिक दौर में शिक्षा के साथ स्कील जरूरी है।  बोर्ड का उद्देश्य श्रमिकों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाना है।
मुख्य अतिथि कुलपति एवं क्षेत्रीय  सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि देश के विकास में श्रमिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित कर रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य श्रमिकों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराना है। देश में 94 प्रतिशत असंगठित क्षेत्र में कार्य करते है, ऐसे में उनकी सामाजिक सुरक्षा, रोजगार की गारंटी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि श्रम के क्षेत्र में महिलाएॅ भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। महिला श्रमिकों के लिए मातृत्व लाभ योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार के अवसर तथा कौशल विकास प्रशिक्षण जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि श्रमिकों को सरकार की योजनाओं की सही जानकारी मिलना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि वे इनका पूरा लाभ उठा सकें। उन्होंने श्रमिक शिक्षा कार्यक्रमों को इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम श्रमिकों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और उपलब्ध सुविधाओं के प्रति जागरूक करते हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ श्रमिकों को कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और नई तकनीकों के प्रति भी जागरूक किया जाना चाहिए। इससे न केवल श्रमिकों का जीवन स्तर बेहतर होगा बल्कि देश की उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी।

बैठक में पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, प्रिंस परमार, पवन गोयल, राजकुमार गौड, कॉमरेड गोपी किशन, नदीम खान, डॉ. पवन तलेसरा, विनोद शर्मा, गजेन्द्र सिंह राठौड, सहायक निदेशक बालकृष्ण शुक्ला, सुभाष श्रीमाली, सिस्टर कीर्ति सहित समिति के सदस्यों ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए और श्रमिक शिक्षा कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने पर चर्चा की। अंत में श्रमिकों के हित में चल रहे कार्यक्रमों को और अधिक व्यापक स्तर पर संचालित करने पर सहमति व्यक्त की गई।

By Udaipurviews

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