संघ के विस्तार का अर्थ राष्ट्रीय विचार का विस्तार- श्री दत्तात्रेय होसबाले, सरकार्यवाह, रा.स्व.संघ

  • देश के नागरिकों का औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होना आवश्यक
  • भारतीय विमर्श समस्त विश्व के कल्याण का विचार
  • अंडमान, अरुणाचल सहित पूरे देश में समाज संघ से जुड़ रहा
  • महापुरुष हम सबके हैं उनके योगदान और मार्गदर्शन पर हो बात
  • संघ में सबका स्वागत, राष्ट्र और समाज के लिए अच्छा काम करने वाले सभी लोगों को संघ का ही मानते हैं
  • किसी के विरोध के लिए संघ की स्थापना नहीं
  • कार्य विस्तार के कारण से होगा विकेंद्रीकरण

 समालखा(पानीपत)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक संगठन कार्य में विस्तार, राष्ट्रहित में समाज की सज्जन शक्ति की अधिक सक्रियता और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ सम्पन्न हो गई। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकारों से संवाद किया। श्री होसबाले ने बताया कि पिछले वर्ष में संगठन कार्य का उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। संघ की शाखाएं पहले लगभग छह हजार की वृद्धि के साथ 88 हजार से अधिक हो गई है तथा स्थान भी बढ़कर 55 हजार से अधिक हो गए हैं। इसके साथ ही साप्ताहिक मिलन और मंडली की संख्या भी बढ़ी है। संगठन कार्य में विस्तार को इस प्रकार देखना भी आवश्यक है कि अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी संघ की शाखाएं संचालित हो रही हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में भी इस सांगठनिक विस्तार को स्पष्टता से देखा जा सकता है। अंडमान में हिंदू सम्मेलन में 9 द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोग सम्मिलित हुए जिसमें सरसंघचालक जी की उपस्थिति रही। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश जैसे कम जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश में भी 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की।

श्री दत्तात्रेय होसबाले के अनुसार सांगठनिक विस्तार के साथ संघ समाज में गुणवत्ता संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण है।  भारतीय अथवा हिंदुत्व केवल एक विचार नहीं बल्कि जीवन शैली है और इसके माध्यम से समाज में गुणवत्ता का विस्तार होना चाहिए। इसी उद्देश्य से समाज की सज्जन शक्ति को एकत्र करना और Power of Good का राष्ट्रहित में प्रवृत्त होना आवश्यक है।

सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय ने कहा कि समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति, पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए और उनके माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी के बलिदान के 350 वें वर्ष के अवसर पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम किए जिनमें 7 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए। इसी प्रकार राष्ट्रगीत वंदेमातरम की 150 वर्षगांठ भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। उन्होने कहा कि आगामी वर्ष में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650 वें प्राकट्य वर्ष पर कार्यक्रमों की योजना बनी है।

संघ के आगामी वर्ष के नियमित प्रशिक्षण वर्गों की जानकारी देते हुए दत्तात्रेय जी ने बताया कि 11 क्षेत्र के वर्ग तथा एक नागपुर के वर्ग को मिलाकर कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग संचालित किए जाएंगे। इस प्रतिनिधि सभा में गौसेवा और ग्रामविकास की भी योजनाओं पर विचार किया गया है। नागरिकों को प्रेरित किया जाएगा कि वे घर की छत पर सब्जी गार्डन बनाएं उसमें देसी गोबर और गौमूत्र की खाद का उपयोग करें जिससे गौसंवर्धन में सभी सहयोग कर सकते हैं। इसी तरह हरित घर बनाने का भी संकल्प नागरिक ले सकते हैं जिससे घर में पॉलीथीन न्यूनतम उपयोग, जल संरक्षण आदि प्रयास किए जा सकते हैं।

संघ की संगठनात्मक संरचना में परिवर्तन संबंधित प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री होसबाले ने कहा कि संरचना में विकेन्द्रीकरण पर विचार हुआ है जिसमें प्रांत के स्थान पर छोटी इकाई संभाग बनाने का प्रस्ताव है जिसके लागू होने पर 46 प्रांत के स्थान पर 80 से अधिक संभाग होंगे।

एक प्रश्न के उत्तर में सरकार्यवाह जी ने कहा कि समाज में जातिगत आधार पर विभेद को समाप्त करने के लिए मीडिया को भी आगे आना चाहिए और किसी भी चुनाव में मतदाताओं की संख्या का जाति आधारित आकलन बंद करना चाहिए। उन्होने वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में देश की सरकार द्वारा राष्ट्रहित में किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की और कहा कि संघ विश्व में शांति और विकास का पक्षधर है। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने किसी समुदाय और पंथ-पूजा पद्धति के विरोध के लिए संघ की स्थापना नहीं की। संघ के दूसरे सरसंघचालक श्री गुरुजी ने भी कहा कि हम सबके पूर्वज एक हैं और पूजा-पाठ की पद्धति की भिन्नता से कोई अंतर नहीं आता, इसमें डीएनए शब्द नहीं था किंतु अभिप्राय यही था। तीसरे सरसंघचालक बालासाहब देवरस ने भी कहा कि भारत को अपनी मातृभूमि व अपना राष्ट्र मानने वाले और भारतीयता को जीने वाले सभी हिंदू हैं। संघ में सबका स्वागत है, जो भी समाज के लिए अच्छा कार्य कर रहा है हम उसको संघ का स्वयंसेवक ही मानते हैं।

अंडमान, अरुणाचल सहित पूरे देश में संघ के लिए समाज में उत्साह :  

अंडमान में प्रमुख 9 द्वीपों से 13 हजार से अधिक लोग सरसंघचालक जी की उपस्थिति में हुए हिंदू सम्मेलन में सम्मिलित हुए। इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश जैसे कम जनसंख्या घनत्व वाले प्रदेश में भी 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की।

 जाति-पंथ के भेद से ऊपर उठकर हो महापुरुषों का सम्मान एवं अनुकरण : समाज में महापुरुषों के कार्यों को जाति, पंथ के भेद से ऊपर उठकर स्वीकार करना चाहिए और उनके माध्यम से समाज को सकारात्मक परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहिए। संघ के स्वयंसेवकों ने इसी दिशा में नवम गुरु श्री तेगबहादुर जी के बलिदान के 350 वें वर्ष पर देशभर में 2 हजार से अधिक कार्यक्रम किए जिनमें 7 लाख से अधिक लोग सम्मिलित हुए।

 संघ की संगठनात्मक संरचना में विकेन्द्रीकरण की योजना : अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विस्तार के साथ-साथ कार्य में गुणवत्ता तथा सुगमता की दृष्टि से संगठनात्मक संरचना के विकेन्द्रीकरण पर भी चर्चा हुई। आने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक तक प्रांत के स्थान पर संभाग बनाने का विचार हुआ है। इसके क्रियान्वयन के बाद वर्तमान में जो 46 प्रांत हैं उनके स्थान पर 80 से अधिक संभाग बनने की संभावना है।

 

By Udaipurviews

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