उदयपुर। भारत अपनी समृद्ध धार्मिक संस्कृति और परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। राजस्थान की धरती पर आज भी माताएं एवं बहनें इन परंपराओं को पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभा रही हैं। इसी परंपरा के अंतर्गत इस वर्ष 13 मार्च 2026 को दशा माता की पूजा श्रद्धा व धूमधाम के साथ मनाई गई।
उदयपुर शहर के प्रतापनगर स्थित रविंद्र नगर में महिलाओं द्वारा दशा माता की पूजा बड़े ही उत्साह और भक्ति भाव के साथ की गई। यह पूजा होलिका दहन के बाद प्रारंभ होकर दस दिनों तक चलती है, जिसमें माताएं और बहनें मां पार्वती को दशा माता के रूप में पूजती हैं तथा व्रत एवं उपवास रखकर परिवार की सुख-समृद्धि और ग्रहों की प्रतिकूल दशा दूर होने की प्रार्थना करती हैं।
पूजा के दौरान महिलाओं ने पीपल के वृक्ष को देवी-देवताओं के समान मानकर कच्चे सूत का धागा बांधा और विधि-विधान से माता की आराधना की।
रोटरी क्लब (उदय) के एडमिनिस्ट्रेटिव डायरेक्टर अशोक वीरवाल की पत्नी व समाजसेविका अनिता वीरवाल ने बताया कि दशा माता को जीवन की विपरीत परिस्थितियों को दूर करने वाली देवी माना जाता है। ऐसे में उनकी पूजा और व्रत करने से ग्रहों की अशुभता कम होती है तथा घर में धन-धान्य, सुख-शांति और संतान की उन्नति में वृद्धि होती है।
इस अवसर पर अनिता वीरवाल ने नवविवाहित महिलाओं को पूजा की विधि भी बताई। उन्होंने बताया कि पूजा में रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत, पुष्प तथा कच्चे सूत का धागा माता को अर्पित किया जाता है। पूजा के बाद इस पवित्र धागे को महिलाएं और पुरुष अपने गले में धारण करते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पूजा के दौरान महिलाएं को 16 सिंगार कर के दशा माता की दस कथाएं कही और पढ़ी जाती हैं, जिनमें नल-दमयंती की कथा प्रमुख मानी जाती है। पूजा के अंत में दशा माता को गुड़, चना, नेवज सहित अन्य प्रसाद अर्पित किया जाता है।
रविंद्र नगर में श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाई गई दशा माता की पूजा
