उदयपुर – सुरों की मंडली के संस्थापक मुकेश माधवानी ने बताया की अशोका पैलेस स्थित मधुश्री ऑडिटोरियम में सुरों की मण्डली की कार्यकारिणी की अत्यावश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सुरों की मण्डली की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए इसका देश भर में शाखाएं खोलकर आमजन को संगीत के क़रीब लाने का सपना साकार करते हुए राष्ट्रीय पहचान बनाने की कार्यनीति बनाने पर गहन चिन्तन किया गया
मीडिया प्रभारी ईश्वर जैन “कौस्तुभ” ने बताया गया है कि बैठक में माधवानी ने बैठक का मुख्य एजेंडा सुरों की मण्डली का विस्तार करते हुए प्रतिमाह तीन शहरों में सुरों की मण्डली की शाखाएं खोलना है तथा वहां स्थानीय स्वैच्छिक और सेवादाता को संयोजक मनोनीत किया जाकर उनके द्वारा द्वारा नियमित संगीत आयोजन करके संगीत-प्रेमियों को खुला मंच देते हुए जनता का मनोरंजन करना मुख्य उद्देश्य रहेगा. इसकी पहली कड़ी में जयपुर, कोटा और रतलाम में सुरों की मण्डली की शाखाएं खोली जाएंगी.
बैठक में कार्यकारिणी के 15 सदस्यों ने भाग लिया. इस बैठक में पुरुषोत्तम शाकद्वीपीय, निधि सक्सेना, पुनीत सक्सेना, कैलाश कैवल्या, हरीश भाटिया, महेन्द्र चावला, कौस्तुभ, सीपी गन्धर्व, वीनू वैष्णव, नूतन वेदी, विष्णु वैष्णव, योगेश उपाध्याय, इंजी. सीपी जैन, अम्बालाल साहू तथा गोपाल गोठवाल आदि ने भाग लिया. बैठक में माधवानी ने सभी प्रतिभागियों से इस सम्बन्ध में अपने विचार तथा सुझाव मांगे, जिसमें शाकद्वीपीय ने सुरों की मण्डली का पंजीकरण कराने का सुझाव दिया. पंजीकरण हेतु पुरुषोत्तम शाकद्वीपीय, इंजी. सीपी जैन तथा पुनीत सक्सेना ने पंजीकरण का ज़िम्मा लेते हुए प्रक्रिया प्रारम्भ करने का बीड़ा उठाया. सुरों की मण्डली में सदस्यता शुल्क को लेकर भी वैचारिक मंथन किया गया, ताकि संस्था आर्थिक रूप से सुदृढ़ बन सके. इस पहल से कार्यकारिणी के सदस्यों में उत्साह का संचार हो गया है.
