उदयपुर । भारतीय सिन्धु सभा उदयपुर द्वारा 10 स्थानों पर 20 दिवसीय सिन्धी बाल संस्कार शिविरों का सामुहिक समापन समारोह सिन्धु महल जवाहर नगर मे मनाया गया।
सभा के महानगर अध्यक्ष गुरमुख कस्तुरी एवं युवा ईकाई अध्यक्ष विजय आहुजा ने बताया कि इस अवसर पर बच्चों ने सिन्ध की संस्कृति, सभ्यता पर आधारित गीत, नृत्य, एवं नाटक प्रस्तुत किये। झूलेलाल की स्तूति एवं सिन्धी वेष भूषा मे सुसज्जित बच्चों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम से सभागार सिन्धमय हो गया।
सिन्धु सभा के उपाध्यक्ष मुकेश खिलवानी एवं कमलेश चैनानी ने बताया कि इस अवसर पर सिन्धी समाज की समस्त पंचायतों के पदाधिकारियों एवं सहयोगकर्ताओ को उपरणा और शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया
सहयोग कर्ताओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।35 शिक्षकों को उपरणा पहना कर एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
सभा के संरक्षक नानक राम कस्तुरी एवं संभाग प्रभारी प्रकाश फूलानी ने बताया कि इस अवसर पर श्री झूलेलाल सेवा समिति के अध्यक्ष प्रताप राय चुग, मनमोहन हाउसिंग सोसायटी जवाहर नगर के अध्यक्ष भगवान दास छाबड़ा, खानपुर सिन्धी पंचायत के अध्यक्ष किशन वाधवानी, शिकारपुर सिन्धी पंचायत के अध्यक्ष सुखराम बालचन्दानी, हिरन मगरी सेक्टर 3-8 के अध्यक्ष मुरली राजानी, हिरन मगरी सेक्टर 11-13 के अध्यक्ष अशोक गेरा, सिन्धी साहिति पंचायत के अध्यक्ष ओमप्रकाश आहुजा, सिन्धी सेन्ट्रल युवा सेवा समिति के अध्यक्ष गिरीश राजानी, टेकरी सिन्धी पंचायत के अध्यक्ष वाशदेव आहुजा, प्रेम तलरेजा, सनातन धर्म सेवा समिति के संयोजक हेमन्त गखरेजा, उपस्थित थे।
सिन्धु सभा के प्रदेश संरक्षक सुरेश कटारिया एवं महामंत्री डॉ किशोर ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचारक आदरणीय मुरलीधर जी एवं विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग सह कार्यवाह डॉ कौशल जी शर्मा ,सन्त अलख दास, समाज सेवी मीनाक्षी चौधरी, सरला अडवाणी, हेमन्त भागवानी, श्रीचंद खथुरिया, भीमनदास तलरेजा, भारती गुरानी,थे।
संघ प्रचारक मुरलीधर ने अपने उद्बोधन में कहा हमारी बहनें मां भगवती, मां लक्ष्मी, मां सीता, झांसी की रानी, लक्ष्मीबाई, मां शारदे के रूप मे अपने बच्चों को संस्कार देने वाली है। सिन्धी बाल संस्कार शिविरों मे बच्चों को संस्कार देने वाली हमारी बहनों ने बच्चों को उसी रूप में अच्छे संस्कार दिये है जिसकी झलक आज यहां देखने को मिली है,समाज की पहचान अपनी बोली से है। हमारे देश में अलग-अलग बोलिये बोली जाती है। बोली की यह विविधता समाज में हमें जोड़ कर रखती है। आज इन बच्चों ने देश के लिए, समाज एवं धर्म के लिए संकल्प किया है। यह सब देख कर मन मे सन्तोष हुआ कि सिन्धी समाज अपनी जड़ से जुड़ा हुआ है अपनी जड़ से कटा नही है, हेमू कालाणी के बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सिन्ध के सपूत हेमू कालाणी ने देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए 19 वर्ष की अल्प आयु में अपनी मात्रभूमि के चरणों में अपना बलिदान दे दिया ,इस अवसर पर सिन्ध के महाराजा दाहरसेन के देश के प्रति बलिदान को याद करते हुए बताया कि अनेकों बार मुगल आक्रमण कारियों का डट कर मुकाबला किया लेकिन दुर्भाग्यवश मोहम्मद बिन कासिम के सैनिकों ने महिलाओं के भेष मे धोखे से उसकी हत्या कर दी। उनकी पत्नी लाड़ी बाईं ने अपना धर्म एवं सतित्व बचाने केलिए अनेकों विरंगनाओ के साथ जौहर में अपने प्राणों की बलि दे दी। उनकी दो पुत्रीयो ने भी अपने धर्म एवं सतित्व बचाने के लिए अपने प्राणों की आहूति दे दी। सन्त कंवर राम एवं वरुण देवता झूलेलाल ने अवतार लेकर हिन्दू धर्म की रक्षा की।
कार्यक्रम का संचालन दुर्गेश चांदवानी ने किया। अन्त में धन्यवाद सभा के उपाध्यक्ष मुकेश खिलवानी ने दिया।
राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
