साध्वी रत्नापूज्याश्री, साध्वी प्रियदर्शनाश्री के 64 वें दीक्षा दिवस पर महिलाआें ने किया सामूहिक जाप

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

दीक्षा सात्विक जीवन जीने की अपूर्व कलाः साध्वी रत्नज्योति
उदयपुर। जैनाचार्य देवेन्द्र महिला मण्डल,ब्राह्मी महिला मण्डल व श्री सोहन कुंवर महिला मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में देवेन्द्र धाम में साध्वी रत्नापूज्याश्री, साध्वी प्रियदर्शनाश्री के 64 वें दीक्षा दिवस के पावन प्रसंग पर जप साधना एवं भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर साध्वी विचक्षणश्री ने महिलाओं को प्रभावकारी विविध धुनों में सामूहिक जाप करवाया।
साध्वी प्रियदर्शना का जन्म उदयपुर में कन्हैयालाल एंव राजकुंवर बाई लोढ़़ा परिवार में हुआ। सन 1962 में 14 वर्ष की उम्र में आपने वैराग्य दीक्षा ग्रहण की। उनके गुरू गणेशलाल महाराज ने प्रियदर्शनाश्री को उदयपुर में ही दीक्षा प्रदान की।
इस अवसर पर साध्वी रत्नज्योति ने कहा कि दीक्षा सात्विक जीवन जीने की अपूर्व कला है। दीक्षा अन्तर्मुखी साधना है। पूज्याश्रीजी अन्तर्मुखी हो कर मुक्ति मंजिल की ओर निरंतर बढ़ रहे है। साध्वी पियूषदर्शनाश्री नें कहा कि शुभ संस्कारों से श्ुद्धत्व की साधना में 63 वर्ष पूर्ण कर 64 वें वर्ष में प्रवेश किया। साध्वी विचक्षणश्री,अर्पिताश्री,वंदिताश्री मेक्षताश्री ने कहा कि पूज्याश्री का हम सभी शिष्याओं को बहुत स्नेह प्राप्त हो रहा है। सभी ने पूज्याश्री की दीर्घायु की कामना की।
जैनाचार्य श्री देवेन्द्र धाम की कार्याध्यक्ष रजनी डांगी ने बताया कि मुझे पूज्याश्री का बहुत सानिध्य और नजदीक से देखने का अवसर मिला। पूज्याश्री स्नेह,प्रेम एवं वात्सल्य की प्रतिमूर्ति है। अपनी आत्म साधना एवं स्वाध्याय में लीन रहती है।

By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!