विद्या भवन पॉलिटेक्निक कॉलेज के स्टूडेंट ने हॉस्टल में लगाई फांसी 

सुसाइड नोट में लिखा-मम्मी आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा, यहां से जाना ही ठीक है
उदयपुर। शहर के विद्या भवन स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज के एक स्टूडेंट ने गुरुवार रात हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका शव कमरे के पंखे से लटका मिला। पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने लिखा-मम्मी आपको दुखी करके मैं बहुत दुखी हुआ। आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। क्या करता, यहां से जाना ही ठीक था। मुझे माफ करना।

बड़गांव थानाधिकारी पूरणसिंह राजपुरोहित ने बताया कि आत्महत्या करने वाला स्टूडेंट राजसमंद जिले के देवगढ़ निवासी 19 वर्षीय हषवर्धन सिंह था। वह उदयपुर के विद्याभवन पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रथम वर्ष का छात्र था। यहां वह कॉलेज के हॉस्टल में रहता था। गुरुवार रात हॉस्टल में उसके पास वाले कमरे में रहने वाला स्टूडेंट उसके पास आया तो उसका कमरा अंदर से बंद था। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब उसने कोई जबाव नहीं दिया तो उसने वार्डन तथा अन्य साथी छात्रों को इसकी सूचना दी। मौज्ूाद साथी स्टूडेंट्स ने उसके कमरे का दरवाजा तोड़़ा तब उन्हें हर्षवर्धन सिंह पंखे पर रस्सी के सहारे लटका दिखाई दिया। उसकी सांसे थम चुकी थी। घबराए स्टूडेंट एवं वार्डन ने घटना से बड़गांव थाना पुलिस को अवगत कराया। जिसके बाद पुलिस ने शव फंदे से उतारा और एमबी अस्पताल की मोर्चरी पहुंचाया। जहां शुक्रवार सुबह परिजनों के आने पर उसका पोस्टमार्टम कराया गया था। जिसके बाद परिजन शव पैतृक गांव ले गए, जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सुसाइड नोट में लिखा, बहन की अच्छे से पढ़ाई और शादी कराना
थानाधिकारी ने बताया कि कमरे की तलाशी में सुसाइड नोट मिला। जिसे हर्षवर्धन सिंह ने अपनी मां के नाम लिखा। उसने लिखा-मम्मी, बहुत सोचा मैंने मरने से पहले पर अब मैं ये सब दुख देखकर थक चुका हूं। कुछ समझ में नहीं आ रहा। अभी कॉलेज की फीस भरनी है। मुझे पता है मेरे लिए 15 हजार रुपए देना कोई बड़ी बात नहीं है। पर मैं आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। मेरे बाद बहन नेतल की पढ़ाई और शादी अच्छे से कराना। मेेरा सपना था कि नेतल की शादी अच्छे से करने का, लेकिन चाहकर भ्ी पूरा नहीं कर सकता। अब आप लोगों की हालत मुझसे नहीं देखी जाती। आम बहुत अच्छे हो। मम्मी आपको दुखी करके में दुखी हुआ। पर क्या करता यहां से जाना ही ठीक था। मुझे माफ करना।
परिवार का इकलौता बेटा, 11 फरवरी को गया था घर
हर्षवर्धन सिंह अपने परिवार का इकलौता बेटा था। परिजनों ने बताया कि वह 11 फरवरी को घर आया था। उसने अपने पापा से कहा था कि कॉलेज की बाकी 15 हजार रुपए की फीस जमा करानी है। 14 फरवरी को वह वापस कॉलेज आ गया था। परिजनों को दुख है कि हर्षवर्धन ने कभी अपनी समस्या शेयर नहीं की।
By Udaipurviews

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