फतहनगर में संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा का छठा दिन

फतहनगर। नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन कथा प्रवक्ता राम स्नेही संत दिग्विजय महाराज ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए अंहकार का त्याग जरूरी है। गुरूवार को गोपी विरहगीत, महा रासलीला, अक्रूर प्रसंग, श्रीकृष्ण के मथुरागमन, कुब्जा उद्धार, कंसवध, उद्धव प्रसंग, द्वारिका निर्माण, कालयवन, जरासंध वध, बलराम विवाह एवं रुक्मणी विवाह की भावपूर्ण, करुणामय एवं झाँकीमय प्रस्तुति दी गई।

कथा में उन्होने कहा कि क्षणभंगुर जीवन में प्रभु कृपा के लिए मिट्टी की नश्वर काया एवं संपत्ति के अहंकार का त्याग करें। कुछ कह गए कुछ सह गये कुछ सहते सहते मर गए इसलिए सफल जीवन के लिए मैं और अहम का त्याग करें। रामायण जीना, महाभारत मरना और सन्त मोक्ष मार्ग दर्शाते हैं। साधना के साथ सद्गुरु कृपा ही मुक्ति दाता है। परमात्मा भावना अनुरूप स्वयं रस स्वरूप है।

आज आयोजन में दादूपंथ के पीठाधीश्वर आचार्य संत ओमप्रकाशदास महाराज, संत रामभजनदास, महंत शिवशंकरदास एवं सन्त समुदाय का पदार्पण होने पर भव्य स्वागत सम्मान किया गया। संत रामभजनदास महाराज ने आशीर्वचनों के साथ कहा कि भागवत ज्ञान का सागर है। कथाएँ मन को परमात्मा में लगाती है। कलियुग केवल नाम आधारा। जीवन में हरिनाम और सन्त समागम अति दुर्लभ है। कथा के विश्राम के बाद महाआरती की गई एवं प्रसाद वितरण किया गया।

 

By Udaipurviews

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