नव आगंतुक विद्यार्थियों का दीक्षारंभ समारोह
मेरी माटी, मेरा देश के तहत विधार्थियों ने निकाली अमृत कलश यात्रा
उदयपुर 13 अक्टुबर / जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय के संघटक विज्ञान सकाय के नव आगन्तुक विधार्थियों के लिए आयोजित दीक्षारंभ समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि हमें विधार्थियों को शिक्षा जगह विद्या देनी होगी। प्रारंभ से ही उसमें शिष्टाचार केे गुणों का रोपण करना होगा। शिष्टाचार से विधार्थियों में प्रतिभा जागृत होती है। उन्होंने कहा कि विधार्थी के हाव भाव एवं शिष्टाचार से उसके आचरण का पता लग जाता है कि वह किस दिशा की ओर बढ़ रहा है। विद्यापीठ का ध्येय वाक्य है सरस्वती देवयंतों हवंते। हम विधार्थियों को ऐसी शिक्षा से जिससे उनमें देवत्व जागृत हो। अंग्र्रेजों की मेकोलो शिक्षा प्रणाली ने हमारी पूरी शिक्षा व्यवस्था को ही तहस नहस कर दिया। हमें शिक्षा को विद्या में बदलने की जरूरत है। हमें पुनः सनातन मूल्यों की ओर लोटना होगा और गुरूकुल व्यवस्था कोे अपनाना होगा। भारत सस्कृति की वजह से जिंदा है हमारे सनातन मूल्य शास्वत है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए रोड मेप बनाये। जीवन में सुनने की आदत डाले।
प्रारंभ में समन्वयक डॉ. सपना श्रीमाली ने अतिथियों का स्वागत करते हुए दीक्षारंभ समारोह की जानकारी दी। समारेाह में महाविद्यालय द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
मेरी माटी, मेरा देश के तहत विधार्थियों ने निकाली अमृत कलश यात्रा:- डॉ. उत्तम प्रकाश शर्मा ने बताया कि समारोह पश्चात आजादी के अमृत महोत्सव के तहत भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में चलाए जा रहे मेरी माटी, मेरा देश अभियान के तहत विधार्थियों द्वारा अमृत कलश यात्रा निकाली गई जिसका शुभारंभ कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने हरी झण्डी दिखा कर रवाना की। इस अवसर पर डॉ. युवराज सिंह राठौड़, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, डॉ. एसबी नागर, आरीफ, डॉ. खुशबू जैन, डॉ. भावेश जोशी , डॉ. दिप्ति सोनी सहित विधार्थियों ने भाग लिया।
संचालन सिद्धिमा ने किया जबकि आभार डॉ. मंगलश्री दुलावत ने जताया।
