उदयपुर। नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् द्वारा जिला साक्षरता अधिकारियों एवं मुख्य संदर्भ व्यक्तियों का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
संभागियों को संबोधित करते हुए आरएससीआरटी की निदेशक कविता पाठक ने व्यस्क शिक्षार्थियों को 21वीं सदी के नागरिक गुणों एवं कौशलों से युक्त करने के लिए साक्षरता कार्यक्रम में बुनियादी अक्षर एवं संख्या ज्ञान के साथ डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता को समान महत्व दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उपनिदेशक कमलेंद्र सिंह राणावत ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य 21वीं सदी की बदलती आवश्यकताओं एवं संदर्भों के साथ चलाए जा रहे नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के विविध आयामों पर संभागियों का आमुखीकरण करना है। कार्यक्रम में साक्षरता एवं सतत शिक्षा निदेशालय के संयुक्त निदेशक डॉ. के.सी. कलाकार एवं सहायक निदेशक विक्रम सिंह ने शिक्षार्थियों की आकलन प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। राज्य संदर्भ व्यक्ति एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवनीत शर्मा ने व्यस्क शिक्षार्थियों के लिए निर्मित प्रवेशिका उजास की संरचना एवं विषयवस्तु पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम प्रभारी सूरज सोनी ने स्वयंसेवकों के लिए निर्मित मार्गदर्शिका पर संभागियों को आमुखिकृत किया ताकि वे इस कार्यक्रम की उपयोगिता एवं संचालन विधि को आगे स्वयं सेवकों तक प्रभावी ढंग से संप्रेषित कर सकें। अंत में खुले सत्र में संभागियों के विभिन्न प्रश्नों पर संदर्भ व्यक्तियों द्वारा सार्थक अंत:क्रिया की गई। आरएससीईआरटी के अतिरिक्त निदेशक शिवजी गौड ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में गौरव गोस्वामी, नितेश माली एवं शिवम चौधरी का तकनीकी सहयोग रहा।
अक्षर व संख्या ज्ञान के साथ डिजिटल साक्षरता समय की जरुरत-कविता पाठक
