घूस लेने वाले चिकित्सा अधिकारी को तीन साल की कैद 20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई

उदयपुर। दुर्घटना में घायल हुए रोगियों की मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने की एवज में 1800 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए डूंगरपुर सीएससी के तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी को शनिवार को अदालत ने दोषी करार देते हुए 3 वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
प्रकरण के अनुसार 17 सितम्बर 2012 को निचली बरौठी बिछीवाड़ा डूंगरपुर निवासी लक्ष्मणलाल पुत्र कांतिलाल व लाला पुत्र हकरा ने रिपोर्ट दी कि आज दोपहर को करीब दो से तीन बजे उसकी बहुएं बबली पुत्र रणछोर व रमीला पत्नी शंकर बरोठी गांव से हमारे घरपर निचली बिरोठी आते समय रास्ते में टेम्पो पलट गया। उसमें सवार चौदह लोग घायल हो गए। रमीला व बबली को भी दुर्घटना में चोटें आई। मेडिकल करवाया तो डॉक्टर राम्मोहन सिंंह चौहान ने मेउिकल करने के लए प्रत्येक घायल से पांच-पांच सौ रुपए और इस एक्सीडेंट में उसके भाई लक्ष्मण, माया को भी चोटें आई तो डॉक्टर चौहान ने माया लक्ष्मण बबली रमीला प्रत्येक से 500-500 रुपए कुल 2000 रुपए मागे। रुपए नहीं होने पर डॉक्टर ने मेडिकल नहीं बनाकर दिया। इस पर परिवादी लक्ष्मण ने ब्यूरो कार्यालय में शिकायत की। 17 सितम्बर 2012 को ही शिकायत का सत्यापन किया। सत्यापन के दौरान गांव पटौदी फारुख नगर गुड़गांव हरियाणा निवासी तत्कालीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिछÞीवाड़ा डूंगरपुर के मेडिकल आॅफिसर डॉ राममोहन सिंह पुत्र बलवीर सिंह चौहान द्वारा रिश्वत की राशि मांगने की पुष्टि हुई। 18 सितम्बर 2012 को रिश्वत के 1800 रुपए के लेकर परिवादी को डॉक्टर के पास भेजा। आरोपी डॉक्टर ने रिश्वत की राशि लेकर पेंट की जेब में रखी। उसी दौरान इशारा मिलते ही ब्यूरो टीम ने सरकारी आवास से आरोपी डॉक्टर को 1800 रुपए रिश्वत की राशि के साथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने रिश्वत की राशि लेकर क्वार्टर में रखे कूलर के ऊपर अखबर के ऊपर रख दिए। ब्यूरो टीम ने डॉक्टर को रिश्वत की राशि के हाथों गिरफ्तार किया और मौके कार्रवाई पूर्ण की। आरोपी के खिलाफ मुख्यालय के आदेशानुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं में डॉक्टर के खिलाफ मामला दर्ज कर 18 जून 2014 को आरोप पत्र पेश किया।
अभियोजन विभाग के सहायक निदेशक पुरुषोत्तम नामा ने बताया कि दुर्घटना में घायल के मेडिकल बनाने के एवज में 1800 रुपए की रिश्वत लेते भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो डूंगरपुर की टीम ने सीएससी बिछीवाड़ा के तत्कालीन मेडिकल आॅफिसर गुड़गांव निवासी डॉ राममोहन सिंह पुत्र बलवीरसिंह चौहान को गिरफ्तार किया। आरोपी पर आरोप सिद्ध करने के लिए विशिष्ट न्यायालय ने (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) क्रम -2 की अदालत में 21 गवाह और 49 दस्तावेज प्रदर्शित कर आरोपी डॉ राम मोहन पर आरोपी सिद्ध करने में सफल रहे। तर्क दिया कि अधिकारी ने अपने पद व अधिकारों का दुरुपयोग कर अपने मूल जायज काम के बदले अवैध रूप से रिश्वत की राशि ली है। पीठासीन अधिकारी वीरेंद्र कुमार जसूजा ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी डॉ राममोहन सिंह दोषी करार देते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 दोषी करार देते हुए तीन साल का कारावास व दस हजार रुपए व धारा 13/1/डी/13/2 में एक वर्ष कारावास व दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
रिश्वत की मांग की प्रवृति दिनोंदिन बढ़ती जा रही
पीठासीन अधिकारी वीरेंद्र कुमार जसूजा ने अपने फैसले में लिखा कि वर्तमान समय में लोक सेवकों द्वारा अपना विधिक एवं उचित कर्तव्य निर्वहन न कर अपने वैध पारिश्रमिक से भिन्न रिश्वत की राशि की मांग की प्रवृति दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। इस मामले में भी आरोपी डॉक्टर ने घायलों से मेडिकल बनाने के नाम पर 500-500 रुपए की रिश्वत की मांग की और 1800 रुपए अपने सरकारी आवास पर रंगे हाथों गिरफ्तार हुआ है। इस प्रकार वर्तमान में लोकसेवकों द्वारा भ्रष्टाचार करने की बढ़ती प्रवृति को दृष्टिगत रखते हुए आरोपियों को दंडित किया या दोषसिद्ध किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।

By Udaipurviews

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