– साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की
उदयपुर 27 जुलाई। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में बुधवार को विशेष प्रवचन हुए। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में सुबह 7 बजे दोनों साध्वियों के सानिध्य में अष्ट प्रकार की पूजा-अर्चना की गई।
चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा ने कहा कि जिसका जन्म हुआ है, उस व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है। प्राप्त जीवन को पूर्ण करके यहां से जाना तय है। जीवन प्राप्त होने के बाद महत्त्व पूर्ण यह नहीं है कि हम कितना जीते हैं, महत््वपूर्ण यह है कि हम कैसे जीते हैं? अगर हमारे जीवन से जगत को संतोष है, तो ही हमारे जीवन की कीमत है, बाकी तो पृथ्वीतल पर जन्में तो क्या? और नहीं जन्में तो क्या ? यह जीवन अगर इस जगत के लिए संतोष प्रद बने तब ही इस जीवन की कीमत है। विश्व के तमाम प्राणी सुख चैन से जी सके इसके लिए आप और हम मेहनत कर रहे है, प्रयत्न कर रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि आप शरीर के लिए मेहनत कर रहे है और हम आत्मा के लिए। आप शरीर को निरोगी बनाने के लिए प्रयास रत है और हमारा प्रयास आत्मा को निरोगी बनाने का है। आत्मा का आरोग्य प्राप्त किए बिना कोई व्यक्ति सुखी हो सके यह संभव नहीं है। आत्मा का आरोग्य प्राप्त कर जन-जन का नहीं अपितु पूरे विश्व का भला करने का प्रयास करना चाहिए।
जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।
जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है : साध्वी वैराग्यपूर्णाश्री
