उदयपुर, 7 मई ( ब्यूरो)। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने “दी केरला स्टोरी” के पीछे भाजपा-आरएसएस द्वारा साम्प्रदायिक सदभाव बिगाड़ने का आरोप लगाया है। माकपा के कहना है कि भाजपा के पास लोकहित का कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए एक फ़िल्म को केरल के बारे में दुष्प्रचार करने का टूल बना लिया गया है। इस सम्बंध में प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया वक्तव्य संविधान अनुरूप नहीं है। एक देश के प्रधानमंत्री के वक्तव्य देश की गरिमा का आईना होते हैं।
माकपा के जिला सचिव राजेश सिंघवी ने रविवार को यहां पत्रकार वार्ता में कहा कि माकपा का स्पष्ट मानना है कि कश्मीर फाइल्स की तर्ज पर “दी केरला स्टोरी “फिल्म बनाई गई है। फिल्म निर्माता या निर्देशक के बजाय प्रधानमंत्री फिल्म का प्रचार कर रहे हैं। भाजपा शासित राज्य सरकारें इस फ़िल्म को टैक्स फ्री कर रही हैं, पॉपकॉर्न खिलाने के बहाने भाजपा लोगों को मुफ्त फिल्म दिखा रही है।
उन्होंने कहा कि इस फ़िल्म में हिन्दू महिलाओं के उत्पीड़न का दावा किया गया है, लेकिन पूरी फिल्म मुस्लिम समुदाय, कम्युनिस्ट विचारधारा, केरल सरकार और केरल के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को बदनाम करने की फर्जी कहानी है। फिल्म में दिखाया गया है कि राज्य सरकार और पुलिस केरल को इस्लामिक राज्य बनाने के लिए चुप है। कम्युनिस्ट विचारधारा को विदेशी बताकर हिन्दू ग्रंथ न पढ़ाने के लिए कम्युनिस्ट विचार वाले पिता को दोषी बताया गया है। फिल्म में ऐसी 32 हजार लड़कियों के आईएसआईएस के केंप में ले जाकर सेक्स स्लेव बनाने का दावा किया गया था, जिसको केरल उच्च न्यायालय के आदेश पर हटाना पड़ा और फिल्म के डिस्कलेमर में काल्पनिक कहानी लिखना पड़ा है। लेकिन, भाजपा इसका सत्य घटना की तरह प्रचार कर रही है।
माकपा सचिव ने कहा कि हमें विश्वास है कि जनता कश्मीर फाइल्स की तरह दी केरला स्टोरी को भी नकार देगी।
