तप से आत्मिक व शारीरिक दोनों लाभ मिलतेःडॉ. राजेन्द्र मुनि

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में प्रभु महावीर की अंतिम वाणी और जैनों की श्गीताश् सदृश उत्तराध्ययन सूत्र का स्वाध्याय कराते हुए डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि तप धर्म का मुख्य प्रवेश द्वार है। साधना और सांसारिक कार्यों में सफलता के लिए तप करना रामबाण औषधि के समान है।
डॉ. मुनि ने कहा कि जहां आधुनिक व प्राचीन होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक और एलोपैथिक पद्धतियां काम नहीं कर पातीं, वहां श्फास्टश् यानी तप पद्धति शरीर को पूर्णतः स्वस्थ बनाती है। अध्ययनों से भी यह स्पष्ट है कि आवश्यकता से अधिक और बार-बार खाने से पाचन शक्ति क्षीण होती है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। प्राचीन काल में योगी व संतजन और वर्तमान समय में डॉक्टर भी स्वल्पाहार (कम और संतुलित भोजन) का संदेश देते हैं, क्योंकि भोजन ग्रहण करने से ज्यादा महत्वपूर्ण उसे पचाना है।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान महावीर ने स्वयं लंबे समय तक कठोर तप आराधना कर केवलज्ञान प्राप्त किया और सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का उपदेश दिया। वही दिव्य उपदेश आज हमें आगमों के माध्यम से उपलब्ध हैं।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज विश्व में शारीरिक, मानसिक, वाचिक, पारिवारिक और गृह हिंसा तेजी से बढ़ रही है। एक देश दूसरे देश पर कब्जा करने की होड़ में लगा है और मानव मन की यह अनंत लिप्सा शांत नहीं हो पा रही है। ऐसे अशांत दौर में भगवान महावीर का अहिंसा का सिद्धांत ही इस हिंसा को समाप्त कर शांति स्थापित कर सकता है।
दीपावली पर्व पर प्रभु महावीर के निर्वाण कल्याणक के उपलक्ष्य में तेले तप की साधना व सामूहिक जाप की आराधना करने वाले सभी तपस्वियों का रमेश खोखावत परिवार द्वारा आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया गया तथा समाज की ओर से उनका आभार व्यक्त किया गया।

By Udaipurviews

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