गुरु पुष्कर जन्म जयंती पर सेवा दिवस का आयोजन, देवेंद्र धाम रोड पर विशाल भंडारे में उमड़े हजारों श्रद्धालु
गुरु पुष्कर जयंती पर आज होगा विशाल शिखर महोत्सव का आयोजन, भारत भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे
उदयपुर। गुरु पुष्कर जन्म जयंती के पावन प्रसंग पर आयोजित सेवा दिवस के उपलक्ष्य में जैनाचार्य देवेन्द्र महिला संस्थान के तत्वावधान में विशाल भंडारे एवं धर्मसभा का आयोजन किया गया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने सेवा को उत्तम धर्म बताते हुए कहा कि मोक्ष प्राप्ति के विभिन्न उपायों में आगमों के भीतर श्सेवाश् को सर्वश्रेष्ठ धर्म का स्थान दिया गया है। उन्होंने भगवान महावीर स्वामी के वचनों का स्मरण कराते हुए कहा कि प्रभु ने फरमाया था मेरी व्यक्तिगत सेवा की तुलना में रुग्णजनों (बीमारों) और जिनशासन की सेवा कहीं अधिक मूल्यवान है। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक मनुष्य को सेवा की शुरुआत अपने परिवार से कर पड़ोसी, समाज, गांव, शहर और राष्ट्र से होते हुए पूरे विश्व कल्याण तक इस सेवा यज्ञ को विस्तार देना चाहिए।
सभा में उपस्थित प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि जैन धर्म पूरी तरह सेवा प्रधान धर्म है। वर्तमान में जैन समाज द्वारा जीव दया, गौशाला संचालन, विद्यालय, महाविद्यालय, धर्मशाला, अन्नदान, वस्त्रदान तथा रक्तदान जैसे अनगिनत सेवा कार्य देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी निरंतर संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सभी धर्म-संप्रदायों में सेवा को सर्वाेच्च दर्जा दिया गया है। इसके लिए मन में दया, करुणा और परोपकार का भाव होना अत्यंत आवश्यक है। सेवक का स्थान कई बार सेव्य से भी ऊंचा होता है; उदाहरण के लिए हनुमान जी प्रभु श्री राम के अनन्य सेवक रहे और आज लोक देवता के रूप में पूजे जाते हैं। सेवा से कष्टों का निवारण होता है और मन में परम शांति का संचार होता है। वास्तव में पर-सेवा ही स्व-सेवा है, क्योंकि प्रकृति हमें वही लौटाती है जो हम दूसरों को देते हैं।
संघ की ओर से श्रीसंघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन एंव महामंत्री हिम्मत बड़ाला ने बताया कि उपाध्याय पूज्य गुरुदेव श्री पुष्कर मुनि जी महाराज ने अपने जीवन काल में लगातार 70 वर्षों तक संपूर्ण भारत भर का नंगे पैरों से भ्रमण किया था फल स्वरुप 25 अक्टूबर को गुरु पुष्कर जन्म जयंती के मुख्य अवसर पर संपूर्ण भारत भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु धर्मसभा में एकत्रित होकर गुरुभक्ति और सेवा समर्पित करेंगे।
सेवा धर्म से ही मोक्ष की प्राप्ति संभवः डॉ. सुरेन्द्र मुनि
