– 12 बसों में उदयपुर तेरापंथ समाज के श्रावक-श्राविका पहुंचे लाडनूं
उदयपुर। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा उदयपुर के श्रावक श्राविकाओं की 12 बसें (करीब 500 श्रावक-श्राविकाएं) गुरु दर्शन यात्रा पूर्ण कर सोमवार सुबह उदयपुर पहुंची। श्रावक श्राविकाओं ने लाडनूं में आचार्य श्री महाश्रमण के दर्शन कर 2032 के चातुर्मास के लिए अर्ज किया।
सभाध्यक्ष राजकुमार कच्छारा ने बताया कि यात्रा का आरम्भ मुनि श्री संजय कुमार ठाणा 3 की प्रेरणा से मंगल पाठ श्रवण कर हुआ। जय जय ज्योतिचरण जय जय महाश्रमण के जयकारों के साथ तेरापंथी सभा, युवक परिषद, महिला मंडल, प्रोफेशनल फोरम, यात्रा संयोजकों, बसों के प्रयोजक, जीतो चेयरमैन व मेवाड़ कॉन्फ्रेंस के निवर्तमान अध्यक्ष, मेवाड़ कॉन्फ्रेंस के वर्तमान अध्यक्ष एंव कई गणमान्य हस्तियों की ऊपस्थित में महिला अहिंसा प्रशिक्षण केंद्र से बसों को हरी झंडी दिखा कर रवाना की गई।
लाडनूं जैन विश्व भारती परिसर में 9 अक्टूबर प्रातः पहुँचते ही सभी श्रावकों ने गुरुदर्शन् का लाभ लिया। प्रवचन श्रवण एंव चारित्र आत्मों के दर्शन, सेवा का अध्यात्मिक लाभ लिया।
10 अक्टूबर को प्रातः तेरापंथी सभा के ऊपरने, बैनर, तख्तियों के साथ दो दो की कतार में विशाल रैली के रूप में सभी श्रावक श्राविका साध्वी प्रमुखा श्रीजी के प्रवास पर दर्शन करने पहुंचे। साध्वी प्रमुखा श्रीजी ने अपार स्नेह बरसाते हुए सभी को आशीर्वचन प्रदान किये। वहां से आचार्य प्रवर के प्रवास स्थल पर दर्शन करते हुए रैली प्रवचन स्थल पहुंची।
तेरापंथ सभा उदयपुर के मंत्री राकेश नाहर ने कहा कि आचार्य श्री ने महती कृपा बरसाते हुए मुनि संजय कुमार आदि ठाणा 3 का चातुर्मास उदयपुर में फरमाया। वर्ष 2007 में आचार्य महाप्रज्ञ के चातुर्मास के काफी लंबे अंतराल 25 वर्ष बाद अब उदयपुर समाज 2032 में चातुर्मास उदयपुर में फरमाने की याचना करने के लिए आपकी सेवा में उपस्थित है। नाहर ने बताया उदयपुर में ज्ञानशाला सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इसी तरह युवक परिषद और महिला मंडल भी सफलतापूर्वक संघ सेवा का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यात्रा में आये सभी श्रावक श्राविकाओं और आर्थिक सहयोग करने वाले भामाशाहों का आभार जताया।
तत्पश्चात अध्यक्ष राजकुमार कच्छारा ने पूर्व आचार्यों के चातुर्मास का स्मरण करते हुए आव्हान किया कि आपश्री का चातुर्मास प्यासी धरती पर नव पल्लवित वृक्ष के लिए अति महत्वपूर्ण है। सभाध्यक्ष के साथ सम्पूर्ण श्रावक समाज ने वहां जय जय महाश्रमण के नारे से समूचे हॉल को गुंजायमान कर दिया। सूर्यप्रकाश मेहता ने अपने ढंग से आचार्य श्री से चातुर्मास के लिए निवेदन किया वहीं यात्रा संयोजक और वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद मांडोत ने आचार्य श्री को विराटनगर, नेपाल के चातुर्मास के दौरान कहा था कि पूरी ट्रेन लेकर आने की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ एक ई मेल ही काफी है। आचार्य श्री ने मंद मुस्कुराहट के साथ पुरानी यादों को स्मरण किया। मांडोत ने कहा कि मेवाड़ की शौर्य भूमि पर आपका चातुर्मास नए दीक्षार्थी भाई बहनों के जीवन को आध्यात्मिकता से परिपूर्ण करने में सहयोगी साबित होगा।
कार्यक्रम में युवाचार्य महावीर मुनि ने भी उदयपुर चातुर्मास के लिए आचार्य प्रवर से निवेदन करते हुए कहा कि यदि आपकी दृष्टि पड़ेगी तो चातुर्मास 2032 का कार्य सम्पादित हो पायेगा। इस पर आचार्य प्रवर ने कहा कि उदयपुर का श्रावक समाज हमेशा से तेरापंथ धर्मसंघ के गुरुजनों के प्रति निष्ठावान रहा है। अगला चातुर्मास दिल्ली है और उसके बाद पंजाब है। संभवतः मालवा क्षेत्र के बाद मेवाड़ और मारवाड़ दो ही क्षेत्र हैं। मेवाड़ के नाम आते ही समूचा हॉल जय जय ज्योतिचरन, जय जय महाश्रमण के नारों से गूंज उठा। सभी ने आग्रह किया कि मालवा से मेवाड़ नज़दीक पड़ता है। इस पर आचार्य प्रवर ने कहा कि सिर्फ दो ही क्षेत्र मेवाड़ और मारवाड़ हैं। अभी समय है तब तक सम्पर्क में रहिये।
इसके बाद वहां से श्रावक समाज ने साध्वी प्रमुखा श्रीजी एंव साध्वीवर्या जी की सेवा दर्शन किये । सभा अध्यक्ष राजकुमार कच्छारा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद मान्डोत आचार्य प्रवर से चातुर्मास विनती की जानकारी दी व उदयपुर चातुर्मास की पैरवी करने के लिए विनती करी। इस अवसर पर सभा वरिष्ठ श्रावक शोभागमल नाहर ने विचार व्यक्त किये।
अंत में मंत्री राकेश नहर ने आभार व्यक्त करते हुए बताया कि लाडनूं में आवास व्यवस्था प्रमुख एवं उदयपुर तेरापंथ सभा के सदस्य मुकेश नाहर का सराहनीय सहयोग रहा जिससे उदयपुर के श्रावक श्राविकाओं को किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।
गुरु दर्शन यात्रा के संयोजक के रूप में अक्षय बडाला, विकास हिरण, विक्रम पगारिया, सभा उपाध्यक्ष अरुण चव्हाण, विनोद चंडालिया एवं भोजन शाला में रमेश पोरवाल, मनोहर बाफना, हेमंत सोनी व सभी बसों के संयोजकों का सहयोग रहा। उदयपुर की तरफ प्रस्थान करते हुए सभी श्रावकों को सालासर बालाजी का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। धार्मिक सेवा उपासना यात्रा का मुख्य उद्देश्य था वह आचार्य प्रवर के मंगल पाठ से पूर्ण हुआ।
आचार्य महाश्रमण के चातुर्मास 2032 का निवेदन करने लाडनूं पहुंची बसें
