पांचवी बार के पार्षद पारस सिंघवी होंगे नगर निगम के महापौर, भरा नामांकन पत्र, कार्यकर्ताओं में हर्ष

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर।  नगर निगम उदयपुर के अगले महापौर पद के लिए चुनाव घोषणा के साथ ही अनेक दावेदारों के नामों की चर्चाओं के बीच बुधवार को भारतीय जनता पार्टी ने सभी को उस समय चौंका दिया जब चर्चाओं में सबसे अंतिम पायदान पर माने जा रहे पारस सिंघवी को अगले महापौर के रूप में नाम की घोषणा कर दी। वार्ड संख्या 24 से पार्षद पद पर विजयी हुई पारस सिंघवी का नाम महापौर प्रत्याशी के रूप में सुन सभी चौंक गए। अब तक अगले महापौर के लिए नामों में सबसे उपर प्रमोद सामर और दिनेश भट्ट के नाम थे जबकि पारस सिंघवी का नाम सबसे अंतिम पायदान पर लिया जा रहा था। अधिक संख्या बल और आरएसएस के दम पर पारस सिंघवी खुद को अंतिम समय में सबसे आगे ले आए और दोपहर करीब सवा दो बजे उन्होंने भाजपा नेताओं, पदाधिकारियों के काफिले के साथ नगर निगम परिसर पहुंचकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपना नामांकन पत्र पेश किया। उनके प्रस्तावक पार्षद पंकज बोराणा बनें। वहीं कांग्रेस पार्टी की ओर से महापौर पद के लिए डॉ पूनम कुंवर राठौड ने नामांकन पत्र पेश किया। नामांकन के दौरान पारस सिंघवी के साथ नगर निगम चुनाव संयोजक पूर्व महापौर रजनी डांगी, पूर्व महापौर जीएस टांक, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, चंद्रसिंह कोठारी, पूर्व सभापति युधिष्ठिर कुमावत सहित कई नेता, पदाधिकारी मौजूद रहे। नामांकन के समय पारस सिंघवी काफी भावुक हो गए और जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड के गले लगकर रोने लग गए। नामांकन की सूचना मिलते ही कार्यकर्ता नगर निगम ओर दौड़ पड़े और सिंघवी को बधाई देने वालों का तांता लग गया।


इससे पहले महापौर पद के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता सहकारिता प्रकोष्ठ प्रदेश संयोजक प्रमोद सामर और पूर्व भाजपा शहर जिलाध्यक्ष रहे दिनेश भट्ट के नाम आगे चल रहे थे। बुधवार सुबह तक भी काफी चर्चा के बाद दोपहर बारह बजे तक उनके नामों पर सहमति नहीं बनी। सियासत में धैर्य और निष्ठा की परीक्षा कितनी लंबी हो सकती है, इसका जीवंत उदाहरण आज झीलों की नगरी के नगर निगम गलियारों में देखने को मिला। जब उम्मीदें लगभग धुंधली होने लगी थीं और दिग्गजों की खींचतान में फैसले की घड़ी अंतिम पलों तक खिंच गई थी, तभी नियति ने वो पन्ना पलट दिया जिसका इंतजार पारस सिंघवी बरसों से दिल के किसी कोने में संजोए बैठे थे। पांचवीं बार पार्षद की दहलीज लांघने वाले सिंघवी के लिए यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि दशकों की जमीनी तपस्या, निष्ठा और उस बड़े सपने की मुकम्मल ताबीर है जो अब सच होने की दहलीज पर खड़ा है। चौथी बार पार्षद बनने पर जब वे उप-महापौर की कुर्सी तक पहुंचे थे, तभी से शहर की प्रथम नागरिक की आसंदी पर बैठने की एक स्वाभाविक ख्वाहिश उनके मन में तैरती रही। इस बार जब वार्ड 24 से जनता ने उन्हें पांचवीं मर्तबा चुनकर भेजा, तो यह आस और गहरी हो गई थी। हालांकि, दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर जैसे कद्दावर नेताओं के गुटों के बीच मचे सियासी घमासान में एक वक्त ऐसा लगा मानो यह सपना फिर फाइलों और समीकरणों में उलझ कर रह जाएगा। इसके पीछे कारण विधानसभा चुनाव में ताराचंद जैन को टिकट देने और विधायक प्रत्याशी के लिए चुने जाने का उनके खुलकर विरोध में उतरने को माना जा रहा था। लगभग सभी यही मान रहे थे ताराचंद जैन का विरोध करना मतलब पारस सिंघवी का आगे का राजनीतिक करियर खत्म। निगम चुनाव में भी पारस सिंघवी को पार्षद के लिए टिकट देने के पीछे अटकलें लगाई जा रही थी कि चुनाव जीतने के लिए उन्हें ठंडा किया गया है ताकि कोई बखेडा खडा न हो कहीं भाजपा चुनाव हार न जाए। फिर भी सिंघवी ने शांति बनाए रखी और समय का इंतजार किया। नामांकन के अंतिम दो घंटों तक चली सांसें थाम देने वाली रस्साकशी के बीच जब संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने सर्वसम्मति के लिए पारस सिंघवी के नाम पर अंतिम मुहर लगाई, तो सिंघवी खेमे में बरसों का इंतजार आंसुओं और मुस्कान के मिले-जुले अहसास में तब्दील हो गया। दो दिग्गजों के टकराव के बीच निगम की कार्यप्रणाली पर दशकों की पकड़ और कार्यकर्ताओं से सीधा जुड़ाव आखिरकार उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ वार्ड 51 से जीते प्रमोद सामर के पक्ष में थे, वहीं विधायक ताराचंद जैन व कटारिया खेमा वार्ड 45 से जीते पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट के नाम पर अडिग था। इस तीखे गतिरोध के बीच संघ की मध्यस्थता ने पारस सिंघवी को उभारा जिस पर दोनों खेमों को झुकना पड़ा। दोपहर 2 बजे जैसे ही पारस सिंघवी नामांकन दाखिल करने पहुंचे, कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बनता था। निगम में भाजपा के पास पहले से ही स्पष्ट संख्याबल मौजूद है, ऐसे में 21 सितंबर का मतदान केवल औपचारिकता रह गया है। महापौर पद तय होने के बाद पार्टी संतुलन साधने में जुट गई है। दिनेश भट्ट को उप-महापौर पद की पेशकश की गई है। यदि वे असहमत होते हैं, तो संगठन के पास अशोक नागदा और युवा पार्षद जतिन श्रीमाली के रूप में दो मजबूत ब्राह्मण विकल्प तैयार हैं।


नामांकन अवसर पारस सिंघवी ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड, संभाग प्रभारी राजेन्द्र सिंह राठौड, नाहरसिंह जोधा, चुनाव प्रभारी कनकमल कटारा, विधायक ताराचंद जैन, फुलसिंह मीणा, सांसद डॉ मन्नालाल रावत, राज्यसभा चुन्नीलाल गरासिया, प्रमोद सामर, रजनी डांगी, जीएस टांक, चन्द्र सिंह कोठारी, रविन्द्र श्रीमाली, युधिष्ठिर कुमावत, हरीश पाटीदार, महेश शर्मा विशेष रूप से कप्तान जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड आदि का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन्होंने उन पर विश्वास व्यक्त किया वे अगले पांच साल तक पार्टी की रीति नीति को आगे बढाने और व पार्टी को ओर अधिक उंचाईयों पर पर पहुंचा कर ऋण उतारने का प्रयास करेंगे। उन्होंने जीवन में कभी कल्पना नहीं की थी कि वे राजनीति में इस पद पर पहुंचेंगें। सिंघवी ने कहा कि साधारण कार्यकर्ता को पांचवी बार टिकिट दिया और जीत कर आज उनकी मेयर पद के लिए घोषणा की है। वे पार्टी के कप्तान गजपाल सिंह राठौड, नानालाल वया, देवीलाल सालवी, पंकज बोराणा का आभार व्यक्त करते हैं। पांच वर्ष के लिए जो पार्टी ने कर्जा दिया है उसे वे विकास का कार्य करके कर्ज को उतारने का प्रयास करेंगें। संगठन सर्वोपरि था, है और जीवन के अंतिम क्षणों तक भाजपा जो उनकी मॉ उसका ऋण चुका कर संगठन को आगे बढाने का कार्य करेंगें। उनकी प्राथमिकता झीले और रोड को लेकर रहेगी। विकास के कार्य को गति देना और उदयपुर शहर कचरा मुक्त हो यह उनकी प्राथमिकता है। संभाग मीडिया प्रभारी चंचल अग्रवाल, शहर जिला मीडिया प्रभारी कृष्णकांत कुमावत ने सिंघवी को बधाई देते हुए कहा कि पार्टी की रीति नीतियों के आधार पर,कार्यकर्ताओ के असीम परिश्रम से  शहर में सातवी बार भाजपा का बोर्ड बना है।

By Udaipurviews

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