ध्यान आत्मा की ओर लौटने की साधनाः मुनि संजय कुमार

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

पर्युषण महापर्व के सातवें दिन महाप्रज्ञ विहार में मनाया ध्यान दिवस
उदयपुर। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज के पर्युषण महापर्व के सातवें दिन महाप्रज्ञ विहार में ध्यान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित धार्मिक प्रवचन में जैन मुनिराज ने श्रद्धालुओं को ध्यान के आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि ध्यान केवल आंखें बंद करके बैठने का नाम नहीं, बल्कि स्वयं को पहचानने और आत्मा की ओर लौटने की साधना है।
मुनिराज ने कहा कि मनुष्य का शरीर एक स्थान पर होता है, लेकिन मन अतीत की स्मृतियों और भविष्य की चिंताओं में भटकता रहता है। ध्यान मन के भटकाव को रोककर व्यक्ति को अपने भीतर झांकने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ध्यान का अर्थ अपने ज्ञाता-द्रष्टा स्वरूप में ठहरने का प्रयास है।
उन्होंने क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को मन की अवस्थाएं बताते हुए कहा कि साधक को इनमें बहने के बजाय उनका साक्षी बनना चाहिए। “क्रोध को देखो, क्रोध मत बनो” का संदेश देते हुए उन्होंने आत्मजागरूकता पर जोर दिया।
मुनिराज ने कहा कि ध्यान की सफलता आंखें बंद रखने की अवधि से नहीं, बल्कि व्यवहार में आए परिवर्तन से मापी जानी चाहिए। क्रोध कम होना, क्षमा बढ़ना, राग-द्वेष घटना और करुणा जागना ही ध्यान की वास्तविक सार्थकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से ध्यान को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ध्यान करने से आत्मा की शुद्धि होती है मनुष्य को प्रतिदिन आधा घंटा टाईम निकालकर ध्यान करना चाहिये! मुनि प्रकाश कुमार ने कहा कि आत्मा के लिए ध्यान, जप, साधना व स्वाध्याय भी करना चाहिये! मुनि सिद्धप्रज्ञ ने कहा कि करमो की निरजरा के लिए ज्ञान ससक्त माध्यम है! स्वास्थय, सन्तुलन को आत्म विकास के लिए ध्यान बहुत उपयोगी होता है इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल द्वारा मंगला चरण किया गया। आमेट से समागत नरेन्द श्रीमाल ने गीतीका प्रस्तुत की। तेरापंथ सभा अध्यक्ष राजकुमार कच्छारा ने आगन्तुक श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। सभा मंत्री ने आगामी कार्यक्रम की जानकारी दी पर्व मे प्रतिदिन 3 सामायिक, 2 घंटे मौन, 1 घंटा स्वाध्याय,9 धु्रवो की सीमा, सचित व जमीकंद का परित्याग, ब्रह्मचर्य का पालन, मंत्रोच्चार व ध्यान (30) मिनिंट, फिल्म, टीवी आदि से दुर एवं रात को संवर करना आदि नियम की पालना करते है आज संवत्वरी महापर्व के रूप मे मनाया जायेगा यह जैनो का सबसे बडा त्योहार संवत्सरी महापर्व है कार्यक्रम प्रातः 8 बजे से शुरू होगा! रात्रि में मुनी सिद्धप्रज्ञ द्वारा रंग चिकित्सा विषय पर प्रवचन दिया।

By Udaipurviews

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