पर्युषण महापर्व की धर्मसभा में आत्मज्ञान का संदेश, तपस्वी एवं समाजसेवी का हुआ सम्मान
उदयपुर। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में देवेन्द्र धाम स्थित महावीर समवशरण में 14 सितम्बर को पर्युषण महापर्व की प्रवचन माला आयोजित हुई। धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य गुरुदेव डॉ. राजेन्द्र मुनि एवं डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने आत्मा के शाश्वत स्वरूप, सम्यक भाव एवं आत्मज्ञान का महत्व समझाया।
डॉ. राजेन्द्र मुनि ने कहा कि आत्मा ही हमारे जीवन का सार और वास्तविक आधार है। मनुष्य संसार की अनेक जानकारियां प्राप्त कर लेता है, लेकिन स्वयं की चेतना और आत्मस्वरूप से अनभिज्ञ रहता है। उन्होंने कहा कि जिस घर में हम रहते हैं, यदि उसी का पता हमें मालूम न हो और दुनिया भर के पते याद हों, तो व्यक्ति भटकता रहेगा। इसी प्रकार आत्मस्वरूप को जाने बिना सांसारिक ज्ञान अधूरा है। सच्चा पंडित वही है, जो आत्मा के स्वरूप को समझता है।
डॉ . सुरेन्द्र मुनि ने ‘अन्तगड़ सूत्र’ के माध्यम से उन भव्य आत्माओं का वर्णन किया, जिन्होंने समस्त कर्मों का क्षय कर सिद्ध पद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्य तभी सार्थक होता है, जब उसमें सच्चे भाव जुड़े हों। आत्मा नित्य एवं अविनाशी है, जबकि उसकी पर्याय बदलती रहती है।
श्री संघ अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल जैन एवं महामंत्री हिम्मत बड़ाला ने बताया कि धर्मसभा में दीर्घ तपस्या करने वाले प्रकाश जी सिंयाल एवं पंजाब से आए समाजसेवी वीर पिता ओमप्रकाश जैन का संघ की ओर से बहुमान किया गया। मुनि की प्रेरणा से श्रावक-श्राविकाओं ने नियम, त्याग एवं प्रत्याख्यान ग्रहण किए। ब्राह्मी महिला मंडल व युवा संघ ने धार्मिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मुणोत एवं पुनमिया परिवार ने प्रभावना वितरित की।
आत्मस्वरूप को जानने वाला ही सच्चा पंडितःडॉ. राजेन्द्र मुनि
