महावीर जैन जागृति परिषद की विशेष कार्यशाला के पोस्टर का विमोचन
उदयपुर। बदलते सामाजिक परिवेश में विवाह योग्य युवक-युवतियों एवं नवविवाहित दम्पत्तियों को रिश्तों की समझ, संवाद, विश्वास और आपसी समायोजन के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से महावीर जैन जागृति परिषद् (रजि.), हिरण मगरी उपनगरीय परिक्षेत्र की ओर से विशेष कार्यशाला “रिश्तों की नाज़ुक डोर को समझिए” आयोजित की जाएगी। कार्यशाला के पोस्टर का विमोचन महावीर स्कूल, हिरण मगरी सेक्टर-4 में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। चंचल मांडावत, उषा मेहता, विद्या खटवाड़ एवं नमिता मेहता ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
परिषद् अध्यक्ष डॉ. हिम्मत लाल वया ने अतिथियों एवं समाजजनों का स्वागत किया। पधारे अतिथियों का पगड़ी एवं उपरणा ओढ़ाकर तथा ‘महावीर अलौकिक’ पुस्तक भेंट कर सम्मान किया गया।
परिषद् मंत्री अरुण वया ने बताया कि राजस्थान विद्यापीठ की कुलपति प्रो. मंजु मांडोत, राजस्थान पत्रिका उदयपुर के मुख्य संपादक राजीव जैन, समाजसेवी एवं उद्योगपति महेन्द्र टाया तथा श्री अम्बागुरु शोध संस्थान के अध्यक्ष ललित लोढ़ा ने संयुक्त रूप से आगामी 11 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाली विशेष कार्यशाला के पोस्टर का विमोचन किया।
कार्यक्रम संयोजक आर.सी. मेहता ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज के बदलते सामाजिक परिवेश में विवाह से पहले सही मार्गदर्शन और विवाह के बाद आपसी समझ, संवाद, विश्वास एवं समायोजन की आवश्यकता बढ़ गई है। कार्यशाला में मुख्य वक्ता प्रोफेसर राजेश्वरी नरेन्द्रन, भारतीय प्रबंध संस्थान, उदयपुर, प्रेरक वक्ता धीरज अरोड़ा एवं सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश महेंद्र मेहता मार्गदर्शन देंगे। कार्यशाला का पंजीयन शुल्क मात्र 200 रुपए रखा गया है।
समाजसेवी महेन्द्र टाया ने कहा कि विवाह की बढ़ती उम्र और बदलती जीवनशैली के कारण सामाजिक एवं पारिवारिक स्तर पर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे विषयों पर समय रहते समाज में खुलकर चर्चा एवं उचित मार्गदर्शन जरूरी है।
राजीव जैन ने कहा कि परिवारों में धैर्य की कमी, संयुक्त परिवार व्यवस्था का विघटन तथा एक-दूसरे के प्रति प्रतिशोध की भावना परिवारों के टूटने के प्रमुख कारण बन रहे हैं। रिश्तों को बचाने के लिए संवाद, धैर्य और एक-दूसरे को समझने की भावना आवश्यक है। उन्होंने नई पीढ़ी को संस्कार देने तथा ऐसे आयोजनों के माध्यम से जागरूक करने की आवश्यकता बताई।
राजस्थान विद्यापीठ की कुलपति प्रो. डॉ. मंजु मांडोत ने कहा कि जैन समाज आर्थिक रूप से समृद्ध एवं उच्च शिक्षित है, लेकिन बच्चों को आवश्यकता से अधिक सुविधाएं मिलने के कारण वे कई बार जीवन की वास्तविक परिस्थितियों एवं चुनौतियों का सामना करने में कठिनाई महसूस करते हैं। उन्होंने बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने तथा उन्हें जीवन की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार करने पर जोर दिया।
ललित लोढ़ा ने समाज के ज्वलंत विषयों पर सभी संस्थाओं को मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास एवं सकारात्मक सोच जरूरी है।
कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता राजेन्द्र अखावत ने किया। उन्होंने पारिवारिक रिश्तों से जुड़े कानूनी पहलुओं की जानकारी भी दी। अंत में परिषद् मंत्री अरुण वया ने सभी अतिथियों, समाजजनों एवं संस्थाओं के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में परिषद् की कोर कमेटी के सदस्य डॉ. हिम्मत लाल वया, अरुण वया, आर.सी. मेहता, राजेन्द्र डागा, सुशील बांठिया, दिनेश नंदावत, राजेन्द्र अखावत एवं हेमन्त पामेचा सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहे। समाजजनों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे युवाओं एवं परिवारों के लिए वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।
