अरावली बचे भी, खनिज विकास भी चले,यूएफएमपी ने मांगी वैज्ञानिक खनन व्यवस्था

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

हाई-पावर्ड कमेटी को सौंपा प्रतिवेदन, संवेदनशील क्षेत्रों को ‘नो-गो’ जोन रखने और वैध खनन जारी रखने का सुझाव
उदयपुर, 10 अगस्त। यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ मिनरल प्रोड्यूसर्स (यूएफएमपी) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई-पावर्ड कमेटी को विस्तृत प्रतिवेदन सौंपकर अरावली क्षेत्र में वैज्ञानिक, जिम्मेदार एवं कानून सम्मत खनन के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की। महासंघ ने मौजूदा वैध खनन पट्टों को जारी रखने तथा वैज्ञानिक रूप से चिह्नित खनिज क्षेत्रों में सभी पर्यावरणीय एवं वैधानिक स्वीकृतियों के बाद नए खनन पट्टों की अनुमति देने का आग्रह किया।
यूएफएमपी अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सोनी ने कहा कि खनिज देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की आधारशिला हैं। सीमेंट, इस्पात, बिजली, सड़क, रेलवे, आवास, ऑटोमोबाइल, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा सहित अनेक क्षेत्रों में खनिजों की आवश्यकता होती है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण और खनिज विकास के बीच संतुलित एवं वैज्ञानिक नीति जरूरी है।
उन्होंने कहा कि संरक्षित वन, पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र, जल पुनर्भरण क्षेत्र और वन्यजीव गलियारों को ‘नो-गो’ क्षेत्र रखा जाए। अन्य क्षेत्रों में जीआईएस मानचित्रण, ड्रोन सर्वेक्षण एवं पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के आधार पर खनन का नियमन किया जाए। यूएफएमपी ने अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि सभी नियमों एवं पर्यावरणीय मानकों का पालन करने वाले वैध खनन को अवैध गतिविधियों के समान नहीं माना जाना चाहिए।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष केजर अली ने कहा कि खनिजों की आपूर्ति प्रभावित होने से निर्माण, सिरेमिक, टाइल्स, सैनिटरीवेयर सहित अनेक उद्योगों के साथ एमएसएमई, परिवहन और रोजगार की पूरी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।
महासंघ के सचिव डॉ. हितांशु कौशल ने अरावली के खनिजयुक्त क्षेत्रों के वैज्ञानिक सीमांकन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए केवल वैज्ञानिक रूप से उपयुक्त क्षेत्रों में नियंत्रित खनन की अनुमति दी जानी चाहिए। इस अवसर पर यूएफएमपी संरक्षक अरविन्द सिंघल, हरीश अरोरा, अजीत राज ओसवाल सहित विभिन्न खनिज आधारित उद्योगों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

By Udaipurviews

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