विद्यार्थियों को कृषि उद्यमिता के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का संदेश-डॉ. प्रताप सिंह

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दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन एग्रीविजन-2026 का समापन समारोह

उदयपुर09 अगस्त 2026। एग्रीविजन-2026 के द्वितीय उत्तर-पश्चिम क्षेत्र सम्मेलन का दूसरा दिन विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सत्रों के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन के माध्यम से विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में नवाचारउद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को लेकर मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

दूसरे दिन श्री अश्विनी शर्मा ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए वंदे मातरम् के ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहींबल्कि देश और राष्ट्र के लिए कार्य करने की प्रेरणा देने वाला राष्ट्रभाव का प्रतीक है। इसके पश्चात कृषि उद्यमिता पर आधारित रोल मॉडल सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में कृषि एवं उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे चार रोल मॉडल्स ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए।

श्री राजेश कुमार ओझा ने ट्राइबल वेदा’, डॉ. श्रवण यादव ने ग्रामीण युवाओं के लिए जैविक खेती : एक लाभकारी उद्यम’ तथा श्री अंकित जैन (फसल) ने कृषि में तकनीक एवं नवाचार’ विषय पर व्याख्यान देते हुए युवाओं को कृषि क्षेत्र में नवाचारउद्यमिता एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

श्री पाशा पटेलअध्यक्षमहाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग एवं पर्यावरण एवं सतत विकास से जुड़े कार्यों के प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता, ‘बांस मैन ऑफ इंडिया’ के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपने व्याख्यान में बांस की खेतीउसके बहुआयामी उपयोगकिसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं तथा पर्यावरण संरक्षण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बांस को केवल वनस्पति के रूप में नहींबल्कि कृषिउद्योगऊर्जा एवं ग्रामीण रोजगार का महत्वपूर्ण आधार बनाकर किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी साधन बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में महिलाओं की कृषि क्षेत्र में भूमिका विषय पर विशेष मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किया गया। इस दौरान डॉ. विमला डूंकवाल ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारीनेतृत्व क्षमता एवं उद्यमिता की संभावनाओं पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

इसके पश्चात समारोह सत्र का आयोजन किया गया। एग्रीविजन के सह-आयोजक सचिव डॉ. अमित कुमार द्वारा सम्मेलन की प्रमुख गतिविधियों एवं निष्कर्षों का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। जिसमें बताया कि सम्मेलन के दौरान दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए गए तथा प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। सम्मेलन में कुल 15 उप-विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान कृषि में नवाचारतकनीकी विकासउद्यमिता एवं युवाओं की भूमिका सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक शोध एवं विचार-विमर्श हुआ। इस सम्मेलन में कुल 624 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

समारोह सत्र में अध्यक्ष के रूप में डॉ. प्रताप सिंहकुलगुरुमहाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयउदयपुर उपस्थित रहे। कुलगुरु ने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में योगदान का किया आह्वान कुलगुरु ने विद्यार्थियों से स्पष्ट विजन के साथ शिक्षा एवं कौशल विकास पर ध्यान देते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित न रहकर समाज एवं राष्ट्रहित से जुड़ी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि एग्रीविजन का गठन वर्ष 2015 में कृषि विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया था। कुलगुरु ने विद्यार्थियों से कृषि नवाचाररोजगार एवं उद्यमिता के माध्यम से आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने राष्ट्रभावनापर्यावरण संरक्षण एवं पौधों की देखभाल पर जोर देते हुए एक पेड़ माँ के नाम” की तर्ज पर एक पेड़ पिता के नाम”   पर भी पौधा लगाने का आह्वान किया तथा वंदे मातरम्” के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. पारस टांक ने कहा कि कृषि क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगारस्वरोजगार एवं उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। युवा केवल भविष्य नहींबल्कि आज के राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विद्यार्थियों से ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों की समस्याओं को समझने तथा कृषि नवाचार को बढ़ावा देने की बात कही। विद्यार्थी केवल नौकरी की तलाश न करेंबल्कि स्वरोजगार अपनाकर दूसरों को भी रोजगार दें।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री विक्रम सिंह फरस्वान ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि विद्यार्थियों को केवल नौकरी तलाशने वाला नहींबल्कि जॉब प्रोवाइडर (रोजगार प्रदाता) बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि एग्रीविजन के प्रयासों से कृषि डिग्री को प्रोफेशनल डिग्री का दर्जा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुआ है। एग्रीविजन के माध्यम से अब तक लगभग 150 उद्यमी तैयार हो चुके हैंजो कृषि क्षेत्र में रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर सृजित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि देश के 77 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में से लगभग 60 विश्वविद्यालयों में एग्रीविजन सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इसके साथ ही विद्यार्थी गांवों में किसानों के साथ मिलकर कृषि चौपाल जैसी गतिविधियों के माध्यम से किसानों से सीधे संवाद कर रहे हैं तथा कृषि संबंधी नवीन तकनीकों एवं जानकारियों को उन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

दो दिवसीय सम्मेलन का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। सम्मेलन के माध्यम से विद्यार्थियों को कृषि उद्यमिता की राह पर आगे बढ़नेनवाचार को अपनाने तथा अपने ज्ञान एवं कौशल का उपयोग राष्ट्र के विकास में योगदान देने का प्रेरणादायी संदेश दिया गया।

पुरस्कार वितरण

इस अवसर पर उत्कृष्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन करने वाले विद्यार्थियों तथा संसद सत्र में पक्ष-विपक्ष की भूमिका का प्रभावी निर्वहन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।  सह-आयोजन सचिव डॉ. अमित विष्णोई ने बताया कि उद्यमिता में युवाओं की भूमिका विषय पर उत्कृष्ट योगदान के लिए विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए गए। पोस्टर प्रस्तुतीकरण में 13मौखिक शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण में 3 तथा युवा संसद के पक्ष एवं विपक्ष में 3-3 प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके साथ ही 8 विभिन्न प्रदर्शनियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को भी पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। डॉ. अंशुल शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित कियाजबकि सुश्री पीयूषा शर्मा ने मंच संचालन किया।

By Udaipurviews

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