वैराग्य भाव के बिना प्रभु की प्राप्ति संभव नहींःसाध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

दूध से घी बनने की प्रक्रिया की तरह आत्मिक उन्नति के लिए भी साधना जरूरी

उदयपुर। श्री वासुपूज्य महाराज मंदिर ट्रस्ट दादावाड़ी, सूरजपोल के तत्वावधान में चल रहे आध्यात्मिक चातुर्मास में शनिवार को गुरुवर्या बहिन म. सा. डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 के सान्निध्य में प्रथम श्रमणी वृंद ने मंगलपाठ किया। इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीश्री ने जीवन की सफलता के लिए आत्मचिंतन, वैराग्य और आसक्तियों के त्याग का संदेश दिया।
साध्वी विद्युतप्रभा श्रीजी ने कहा कि परमात्मा महावीर ने अपने पूर्वजन्म के कर्मों का क्षय करने में साढ़े बारह वर्ष लगाए और प्रमाद रहित होते ही दो घड़ी में केवल्य ज्ञान की प्राप्ति कर ली। इसी प्रकार मनुष्य को भी जीवन की परीक्षा में सफल होने के लिए निर्वेद भाव जगाना होगा और सांसारिक आसक्तियों का त्याग करना होगा। परमात्मा और गुरुमहाराज की आज्ञा को शिरोधार्य करने से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन की सफलता के वास्तविक उद्देश्य पर चिंतन करना चाहिए और आत्मवादी बनना चाहिए। संसारवाद भटकाव का कारण बनता है। जिस प्रकार दर्द दिखाई नहीं देता, लेकिन महसूस किया जा सकता है, उसी प्रकार आत्मा दिखाई नहीं देती, लेकिन उसका अनुभव किया जा सकता है। व्यक्ति को एकांत में बैठकर स्वयं से विचार करना चाहिए कि उसे जीवन में आखिर जाना कहां है।
उन्होंने कहा कि संसार छोड़ देना और मन में वैराग्य भाव उत्पन्न होना दोनों अलग बातें हैं। जैसे दूध में घी दिखाई नहीं देता, लेकिन उसे प्राप्त करने के लिए पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, उसी प्रकार प्रभु की प्राप्ति के लिए मनुष्य को भी वैराग्य और साधना की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
आगम के आचारांग सूत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आस्तिक बनकर आत्मभाव को पहचानना चाहिए। उन्होंने ‘ब्यूटी इज ब्यूटी’ के संदर्भ में परिवार, समाज, धर्म और आत्माकृचार प्रकार की सुंदरता का उल्लेख किया।
साध्वीश्री ने पारसी समाज का उदाहरण देते हुए कहा कि अपनी कमाई में से स्वयं के हिस्से के अतिरिक्त समाज के लिए योगदान की भावना सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसी प्रकार शत्रुंजय तीर्थ पर सवासोमा की सबसे ऊंची टूंक का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज के प्रति जिम्मेदारी और धार्मिक सेवा की भावना को रेखांकित किया।
तपस्वियों का किया बहुमान-इस अवसर पर अट्ठम तप एवं आयंबिल तप की आराधना करने वाले तपस्वियों का बहुमान किया गया। ट्रस्ट मंडल के अध्यक्ष राज लोढ़ा, चातुर्मास संयोजक गजेन्द्र भंसाली, उपाध्यक्ष शैलेंद्र लोढ़ा, केयूप अध्यक्ष गौरव कोठारी, गजेन्द्र सुराणा, केएमपी से सुषमा नाहर एवं मनीषा तातेड ने तपस्वियों का सम्मान किया।
रविवार को बिग बाजार में धार्मिक प्रश्नोत्तरी-चातुर्मास सह संयोजक सुभाष महात्मा ने बताया कि रविवार को बिग बाजार में धार्मिक प्रश्नोत्तरी आयोजित की जाएगी। प्रश्नोत्तरी में विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने सभी श्रावक-श्राविकाओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आयोजन का लाभ लेने की अपील की।

By Udaipurviews

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