उदयपुर, 7 अगस्त। सूरजपोल स्थित दादावाड़ी में चल रहे आध्यात्मिक चातुर्मास के अंतर्गत गुरुवर्या बहिन म.सा. डॉ. विद्युत् प्रभा श्रीजी ने श्रद्धालुओं को कर्म सिद्धांत का गूढ़ रहस्य समझाते हुए कहा कि भगवान महावीर ने अपने केवलज्ञान की अमृतधारा जन-जन तक पहुंचाकर समस्त प्राणियों के कल्याण और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि जीवन का परम लक्ष्य सम्यक्त्व की प्राप्ति और कर्म बंधनों से मुक्त होकर आत्मकल्याण करना है।
अपने प्रवचन में साध्वी श्रीजी ने कहा कि मनुष्य द्वारा किए गए प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है। कर्म बांधते समय व्यक्ति प्रसन्न रहता है, लेकिन जब वही कर्म दुख का कारण बनते हैं तो रोने या पछताने से भी उनसे मुक्ति नहीं मिलती। इसलिए कर्मों को समझना और उन्हें बांधने से बचना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से कर्मों के आवागमन, उनके बंधन तथा उनसे मुक्ति के उपायों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कर्म आठ प्रकार के होते हैं और सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान एवं सम्यक् चरित्र के माध्यम से ही आत्मा इन बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकती है।
इस अवसर पर आगामी धार्मिक आयोजनों की भी घोषणा की गई। फाल्गुन सुदी पंचमी पर भगवान नेमिनाथ का जन्म कल्याणक श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। वहीं 9 अगस्त (रविवार) को गुरुवर्या श्री की निश्रा में प्रवचन के पश्चात खरतर गच्छ महिला परिषद द्वारा श्बिग बाजारश् कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें धार्मिक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता होगी और विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
भगवान नेमिनाथ जन्म कल्याणक के उपलक्ष्य में श्रेष्ठीवर्य रोशनलालदृनिर्मला बेन कोठारी परिवार की ओर से तेला एवं अट्ठम तप की आराधना कराई जाएगी, जिसका संपूर्ण लाभ परिवार द्वारा लिया जाएगा।
कार्यक्रम में ट्रस्ट मंडल अध्यक्ष राज लोढ़ा, चातुर्मास संयोजक गजेंद्र भंसाली तथा कोषाध्यक्ष भूपाल सिंह दलाल ने तेला एवं आयंबिल तप के आराधकों का सम्मान किया। उन्होंने सभी धर्मानुरागी श्रद्धालुओं से आगामी आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनने का आग्रह किया। सह संयोजक सुभाष महात्मा ने कार्यक्रम की जानकारी दी।
कर्मों का बंधन ही दुखों का कारण, सम्यक् ज्ञान से ही मिलेगी मोक्ष की राहःसाध्वी डॉ. विद्युत् प्रभा श्रीजी
