राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के 11 जिलों से आए साहित्यकारों-कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएं, देर रात तक चली काव्य गोष्ठी

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

साहित्यकार संगम एवं काव्यगोष्ठी-2026
साहित्यकार परदेशी की 103वीं जयंती पर सजा साहित्य का भव्य मंच
राजस्थान साहित्य अकादमी एवं परदेशी साहित्य संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित

प्रतापगढ़। राज्य सरकार के राजस्थान साहित्य अकादमी तथा परदेशी साहित्य संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यकार परदेशी की 103वीं जयंती के उपलक्ष्य में पेंशनर्स समाज भवन सभागार में “साहित्यकार संगम एवं काव्य गोष्ठी” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के 11 जिलों से आए साहित्यकारों, कवियों, गीतकारों एवं रचनाकारों ने सहभागिता करते हुए अपनी उत्कृष्ट साहित्यिक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

साहित्यकार श्री सुरेन्द्र सुमन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ साहित्यकार परदेशी के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर वक्ताओं ने परदेशी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें जनमानस के साहित्यकार के रूप में स्मरण किया। वक्ताओं ने कहा कि परदेशी का साहित्य मानवीय संवेदनाओं, लोकजीवन, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक सरोकारों का सशक्त दस्तावेज है तथा नई पीढ़ी को उनके साहित्य से प्रेरणा लेनी चाहिए।

काव्य गोष्ठी में विभिन्न जिलों से आए कवियों ने राष्ट्रप्रेम, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, युवा चेतना, सामाजिक समरसता, मानवीय मूल्यों तथा समकालीन विषयों पर आधारित कविताओं, गीतों, ग़ज़लों एवं मुक्तकों की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। एक के बाद एक प्रस्तुतियों से पूरा सभागार साहित्यिक रसधारा में डूबा रहा और श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया।

दोपहर 3 बजे प्रारंभ हुआ यह साहित्यिक आयोजन देर रात्रि 11 बजे तक सतत जारी रहा। पूरे आयोजन के दौरान साहित्य, संस्कृति एवं लोकमंगल से जुड़े विविध विषयों पर सारगर्भित विचार व्यक्त किए गए तथा साहित्य की सामाजिक भूमिका पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम ने साहित्यकार परदेशी की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और साहित्यिक संवाद को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इस अवसर पर राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के 11 जिलों से पधारे साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए काव्य पाठ एवं विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने देर रात तक आयोजित काव्य गोष्ठी का उत्साहपूर्वक आनंद लिया। मदन वैष्णव द्वारा परदेशी के साहित्य अपने बाल्यकाल के अनुभव साझा किए गए।

इस अवसर पर दादू प्रजापति, राष्ट्र कवि हरीश व्यास, जगदीश शर्मा, चंद्रप्रकाश द्विवेदी, मदन वैष्णव, चांदमल चंद्रेश, चंद्रशेखर मेहता, श्याम सोनी, नरेंद्र व्यास, हूर बानो सैफी, नंदकिशोर राठौड़, ग़फ़िर सागरी, अजय डांगी, चंदा डांगी, शैलेन्द्र शैलू,विशाल जी विशाल,जुल्फीकार आलम ,चन्द्र प्रकाश गहलोत,लोकेन्द्र सिंह चुण्डावत, हरीश बारोलिया, आनंद मयूर, अनिता गुप्ता, अल्का सोलंकी, राजेन्द्र तिवारी, विजय सिंह, भौम सिंह सिसोदिया, विकास सेन, धनपाल धमाका, हरिओम हरपाल, कुंवर प्रताप, सुनील वैष्णव, डी.जे. सिंह ,राजेश रणबांकुरा, योगेश शर्मा, राजेन्द्र जोशी, भंवर जी भंवर, चेतन कृष्ण शास्त्री, मुकेश आनंद भावसार, पंकज तरुण, पुलकित नागर, कांठल कवि रोहित कमलवा, मुकेश निडर, तेजपाल सि़ह सिसोदिया, अली अब्बास, धर्मेन्द्र टेलर, गायक सलीम, बबलू भाई एवं प्राची सहित अनेक रचनाकारों ने राष्ट्रप्रेम, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, युवा चेतना, सामाजिक समरसता, लोकजीवन तथा मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताएं, गीत, ग़ज़लें, मुक्तक एवं अन्य साहित्यिक रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन सुरेन्द्र सुमन एवं कुंवर प्रताप ने किया।
By Udaipurviews

Related Posts

error: Content is protected !!