आत्मकल्याण का मार्ग है धर्म और संयम, चातुर्मास आत्मचिंतन का श्रेष्ठ अवसर: साध्वी डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी
उदयपुर। श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक वासूपूज्य महाराज मंदिर ट्रस्ट, दादाबाड़ी में रविवार को साध्वी डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी,साध्वी प्रज्ञाजंनाश्रीजी, साध्वी नमनरूचि श्रीजी, साध्वी योगरूचि श्रीजी, साध्वी तन्मयरूचि श्रीजी, साध्वी आप्तरूचिश्रीजी आदि ठाणा-6 का मंगल चातुर्मास प्रवेश भक्ति, श्रद्धा और धर्ममय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भव्य अगवानी कर साध्वीवृंद का भावपूर्ण स्वागत किया। पूरे परिसर में जयघोष और मंगल गीतों से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो गया।
चातुर्मास प्रवेश के उपरांत आयोजित प्रथम प्रवचन में साध्वी डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी ने कहा कि चातुर्मास केवल चार महीनों का प्रवास नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण, आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का स्वर्णिम अवसर है। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने जीवन में संयम, सदाचार, क्षमा, करुणा और धर्म को अपनाए तो उसका जीवन सार्थक बन जाता है। बाहरी सुख क्षणिक हैं, जबकि आत्मिक शांति ही वास्तविक सुख है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि चातुर्मास के दौरान अधिक से अधिक धर्म आराधना, स्वाध्याय, सामायिक, तप, त्याग और सेवा कार्यों में भाग लें। उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों का त्याग कर प्रेम, विनम्रता और सद्भाव का मार्ग अपनाना ही सच्ची साधना है। प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया। साध्वी विद्युत् प्रभा श्रीजी म .सा. ने बताया कि वर्ष 2027 में फरवरी में हैदराबाद में निर्माणाधीन माणिक्य महोत्सव दादा आदिनाथ भगवान के मंदिर को 1400 वर्ष पूर्ण होने जा रहे हैं। उसी उपलक्ष्य में माणिक्य स्वामी तप (कुलपाक तीर्थ निमित्त) के तहत 14 उपवास रहेंगे जो 28 जुलाई से प्रारंभ होंगे। 25 अगस्त को 29 वें दिन ये तप पूर्ण होगा। एक दिन उपवास एक दिन बीयासना का रहेगा।
ट्रस्ट अध्यक्ष राज लोढ़ा ने बताया कि इससे पूर्व प्रातः 7ः30 नगर निगम प्रांगण (टाउन हॉल) से नवकारसी के पश्चात हाथी, घोड़े, बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों एवं सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति में भव्य सामैया निकाला गया। शोभायात्रा टाउन हॉल से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सूरजपोल चौराहा होते हुए दादावाड़ी पहुंची। पूरी यात्रा के दौरान नवकार महामंत्र, जिनशासन के जयघोष और धार्मिक भजनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। मार्ग में साध्वीवृन्द के स्वागत में विभिन्न स्थानों पर स्वागत द्वार लगाये गये।
सचिव दलपत दोशी ने बताया कि वर्षा ऋतु के इन चार महीनों में संत-साध्वियां एक ही स्थान पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को धर्म, सदाचार, संयम और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष साध्वी डॉ. विद्युुतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 का चातुर्मास सूरजपोल स्थित दादावाड़ी में आयोजित होगा। इस अवसर पर शहर विधायक ताराचंद जैन, पूर्व उप महापौर पारस सिंघवी, आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य राहुल जैन सहित बाहर से आये अतिथियों का ट्रस्ट की ओर से पगड़ी एवं उपरना पहनाकर बहुमान किया गया।
चातुर्मास संयोजक गजेन्द्र भंसाली ने बताया कि दादावाड़ी पहुंचने पर प्रातः 9ः30 बजे साध्वी श्रीजी का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मंगल प्रवेश कराया गया। इसके पश्चात भगवान जिनेन्द्र देव एवं दादा गुरुदेव के दर्शन-वंदन कर उन्होंने मंगल आशीर्वचन प्रदान किया। चातुर्मास अवधि के दौरान प्रतिदिन प्रातः 9 से 10 बजे तक नियमित प्रवचन होंगे। इसके अलावा स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण, तप, आराधना, नवकार महामंत्र जाप, धार्मिक प्रश्नोत्तरी, ज्ञानवर्धक व्याख्यान, युवाओं एवं महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक सत्र तथा विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चातुर्मास के दौरान पर्युषण महापर्व, संवत्सरी, आयंबिल, तप आराधना सहित अनेक विशेष धार्मिक आयोजन भी होंगे।
सह संयोजक विकास सुराणा एवं सुभाष महात्मा ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से 25 जुलाई को दादा जिनदत्त्सूरिश्वर म.सा. की 872 वीं स्वर्गारोहण जयंती पर गुणानुवाद सभा का आयोजन किया जायेगा। प्रवचन 23 से प्रारम्भ होंगे। 28 जुलाई को चातुर्मास स्थापना की जायेगी।
उपाध्यक्ष शैलेन्द्र्र लोढ़ा एंव आजाद नाहर ने पूरे चातुर्मास में नियमित प्रवचन, धार्मिक अनुष्ठान एवं विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रमों के आयोजन की जानकारी दी। दादाबाड़ी परिसर में चातुर्मास के शुभारंभ के साथ ही धर्म और भक्ति का वातावरण छा गया।
17 वर्ष बाद साध्वी डॉ. विद्युतप्रभा श्रीजी आदि ठाणा-6 का गगनभेदी जयकारों के साथ हुआ मंगल चातुर्मास प्रवेश
