28वें स्थापना दिवस पर एमईएआई उदयपुर चैप्टर का तकनीकी मंथनः नई शिक्षा नीति और आधुनिक खनन शिक्षा पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

उदयपुर व्यूज़ | ताजा खबरें

उदयपुर। माइनिंग इंजीनियर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमईएआई) राजस्थान चैप्टर, उदयपुर ने अपने 28वें स्थापना दिवस के अवसर पर होटल क्लोवर इन में तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में देश में खनन अभियांत्रिकी शिक्षा की वर्तमान स्थिति, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर गहन मंथन हुआ। करीब 60 खनन अभियंताओं, भूवैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों ने इसमें भाग लिया।
कार्यक्रम से पूर्व अध्यक्ष प्रवीण शर्मा की अध्यक्षता में सत्र 2024-26 की आठवीं कार्यकारिणी बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर चैप्टर के संरक्षक आर.पी. गुप्ता और अखिलेश जोशी ने संगठन की 28 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए सदस्यता विस्तार, युवा अभियंताओं को अवसर उपलब्ध कराने तथा उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में किए गए कार्यों की सराहना की।
मुख्य वक्ता डॉ. अनुपम भटनागर, प्रोफेसर एवं पूर्व डीन, कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग (सीटीएई), उदयपुर ने “भारत में माइनिंग इंजीनियरिंग शिक्षा: वर्तमान स्थिति, एनईपी-2020 की चुनौतियां एवं भविष्य की दिशा” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति शिक्षा को अधिक लचीला, बहु-विषयक और कौशल आधारित बना रही है, लेकिन माइनिंग इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण और तकनीकी विषयों के पर्याप्त क्रेडिट बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में लगभग 110 संस्थानों में माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है, लेकिन खनिज संपदा से समृद्ध राजस्थान में अब तक आईआईटी या एनआईटी स्तर का खनन संस्थान नहीं है। हालांकि राज्य सरकार द्वारा उदयपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ माइन्स स्थापित करने की घोषणा को उन्होंने खनन शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
डॉ. भटनागर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, ड्रोन सर्वेक्षण, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), जियोस्पेशियल डेटा एनालिटिक्स तथा हरित एवं सतत खनन तकनीकों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच इंटर्नशिप, शोध, प्रयोगशाला विकास और कौशल प्रशिक्षण में साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विषय पर खुली चर्चा भी हुई, जिसमें नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और आधुनिक खनन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि का स्वागत अध्यक्ष प्रवीण शर्मा एवं संरक्षक अखिलेश जोशी ने किया। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण अखिलेश जोशी की आत्मकथा का लोकार्पण रहा, जिसका विमोचन खनन क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियों, शिक्षाविदों और वरिष्ठ सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। समारोह ने ज्ञान-विनिमय, व्यावसायिक उत्कृष्टता और अनुभवों के दस्तावेजीकरण के महत्व को भी रेखांकित किया।

By Udaipurviews

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