उदयपुर। उदयपुर शहर की महत्वाकांक्षी देवास तृतीय एवं देवास चतुर्थ पेयजल परियोजना को वन स्वीकृति प्राप्त होने से परियोजना के क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह उपलब्धि राज्य सरकार के सतत प्रयासों, प्रभावी समन्वय एवं सभी संबंधित विभागों के निरंतर सहयोग का परिणाम है, जिससे उदयपुर की लाइफलाइन मानी जाने वाली इस परियोजना के निर्माण कार्यों को अब और अधिक गति मिलेगी। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राजस्थान सरकार, राजस्थान वन विभाग तथा परियोजना से जुड़े सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति जल संसाधन विभाग ने हार्दिक आभार व्यक्त किया है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा 25 अप्रैल 2023 को 1690.55 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की गई थी। परियोजना के तहत गोगुंदा क्षेत्र में देवास-तृतीय एवं देवास-चतुर्थ के तहत बांधों तथा लंबी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है, जिनके माध्यम से जल का संचयन एवं उदयपुर की झीलों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। 2349 प्रभावित किसानों में से 812 किसानों को 20.73 करोड़ रुपये से अधिक की मुआवजा राशि वितरित की जा चुकी है।प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन के लिए भूमि आरक्षित कर आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही जारी है। परियोजना के बांध एवं सुरंग निर्माण कार्यों के लिए ठेके जारी किए जा चुके हैं। विभिन्न स्थलों पर निर्माण गतिविधियां प्रगति पर हैं। वन स्वीकृति मिलने से शेष प्रक्रियाओं को भी तेजी मिलेगी और परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन का मार्ग और अधिक सुगम होगा।
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उदयपुर की लाइफलाइन अब पकडे़गी रफ्तार, देवास तृतीय एवं देवास-चतुर्थ को मिली वन स्वीकृति
