एसबीआई इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ बीमा क्लेमा राशि भुगतान करने के आदेश

उदयपुर। स्थाई लोक अदालत द्वारा एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लि को दुर्घटना बीमा क्लेम राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए। प्रकरण में प्रार्थीया हेमलता औदिच्य ने परिवाद प्रस्तुत कर बताया कि उनके पति प्रभुलाल ने 10 लाख रुपए की हेल्थ एवं दुर्घटना बीमा पॉलिसी ले रखी थी, जिसकी वैधता अवधि के दौरान 24 जनवरी 2024 को एकलिंगगढ़ छावनी क्षेत्र में अज्ञात वाहन की टक्कर से वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना में उनके हाथ में फ्रैक्चर हुआ तथा सिर में अंदरूनी चोटें आई थीं। उपचार के बाद वे घर लौट आए, लेकिन बाद में सिर में खून का थक्का जमने के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और 4 मई 2024 को अहमदाबाद उपचार हेतु ले जाते समय उनकी मृत्यु हो गई। प्रार्थीया ने बीमा कंपनी के समक्ष क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन भुगतान नहीं होने पर स्थायी लोक अदालत की शरण ली।प्रार्थीया की ओर से अधिवक्ता हनुमान प्रसाद शर्मा, चेतन चौधरी, आशीष कोठारी एवं मनीष चौबीसा ने पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि दुर्घटना के कारण आई सिर की चोटों से ही बाद में खून का थक्का जमा और उसी के कारण मृत्यु हुई। प्रार्थी पक्ष ने उपचार संबंधी दस्तावेज, अस्पताल रिकॉर्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र तथा शपथ पत्र प्रस्तुत कर बताया कि परिवार की परिस्थितियों एवं पुत्र के मुंबई में नौकरी पर होने के कारण तत्काल पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकी थी। बाद में थाना सविना में रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। वहीं बीमा कंपनी की ओर से दावा किया गया कि प्रभुलाल की मृत्यु किसी दुर्घटना के कारण नहीं बल्कि प्राकृतिक बीमारी से हुई थी तथा दुर्घटना की कहानी केवल बीमा क्लेम प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है। कंपनी ने यह भी कहा कि घटना की तत्काल पुलिस रिपोर्ट नहीं दी गई और आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए, इसलिए कंपनी पर भुगतान का दायित्व नहीं बनता। मामले की सुनवाई के बाद स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष महेन्द्र सिंह सिसोदिया तथा सदस्य राजेन्द्र सिंह राठौड़ एवं डॉ. गरीमा गुप्ता ने अपने निर्णय में माना कि उपलब्ध दस्तावेजों, अस्पताल के प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र एवं अन्य साक्ष्यों से यह प्रमाणित होता है कि प्रभुलाल की मृत्यु दुर्घटना में लगी चोटों के कारण हुई। अदालत ने यह भी माना कि परिवार की परिस्थितियों के कारण पुलिस रिपोर्ट में देरी होना स्वाभाविक था तथा बीमा कंपनी द्वारा मांगे गए आवश्यक दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके थे। न्यायालय ने प्रार्थीया का दावा स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 10 लाख रुपए की बीमा राशि, 27 अगस्त 2025 से वसूली तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 21 हजार रुपये मानसिक संताप तथा 5100 रुपये परिवाद व्यय अदा करने के आदेश दिए। साथ ही आदेश में कहा गया कि यदि एक माह में राशि का भुगतान नहीं किया गया तो आगे 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।

By Udaipurviews

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