एमबी चिकित्सालय में पोपाबाई का राज, तिमारदार परेशान

उदयपुर। संभाग के सबसे बडे महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय में पोपाबाई का राज चला रहा है। चिकित्सालय में रोगी का उपचार करवाने जाने वाले परिजनों को यहां के स्टॉफकर्मियों की अभर्द्रता का सामना करना पडता है। जब परिजनों नाराजगी जताता है तो पूरा चिकित्सालय स्टॉफ आंदोलन और हडताल की धमकियां देकर सरकार, प्रशासन और रोगियों को परेशान पर उतारु हो जाता है।
हुआं यूं कि भीलवाडा जिले से एक गंभीर रोगी का इलाज करवाने के लिए उसे लेकर परिजन एमबी चिकित्सालय पहुंचे जहां रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्ची करवाई। रोगी के परिजन का आरोप है कि पर्ची बनवाने के बाकायदा उपस्थित स्टॉफ ने दस रुपए उससे प्राप्त किए लेकिन उसे पर्ची नहीं दी गई। रात्रिकालीन में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उपचार कर दिया। सुबह परिजन रोगी को लेकर दिखाने के लिए पुन: डॉक्टर के पास गया तो पर्ची के लिए कहा तो वह पर्ची लेने काउंटर पर गया लेकिन उसे पर्ची ही देने से मना कर दिया। परिजन नें बताया कि जब उसने रोगी के इलाज की दुहाई तो मौजूद स्टॉफ ने रात वाले से ही पर्ची लेने के लिए कह दिया। तब परिजन ने उससे कहा कि अभी उसे रोगी का इलाज करवाना है। बार बार आग्रह करने पर भी उसने पर्ची देने से मना कर दिया। तब वह उसका वीडियो बनाने लगा तो स्टॉफकर्मी ने उसे राजकार्य में बाधा उत्पन्न करने का मामला दर्ज करवाने की धमकी दे डाली। यहां वहीं कहावत चरितार्थ होने लगी..एक तो चोरी उस पर सीनाजोरी…।

इस पूरे घटनाक्रम के बारे में जब आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ राहुल जैन से संपर्क किया गया तो उन्होंने खुद को बचाते हुए गेंद चिकित्सालय अधीक्षक डॉ आरएल सुमन के पाले में डालते उनसे इस बारे में बात करने की राह बताई। इस पर डॉ आरएल सुमन को रोगी के परिजन द्वारा स्टॉफ का बनाया वीडियो भेजकर उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने एक बार तो वीडियो देखकर बताने का आश्वासन दिया। इस पर कुछ देर में पुन: उन्हें संपर्क किया तो इस बार उन्होंने उस समय उनके पास समय नहीं होने का हवाला देते हुए शाम तक बताने का कहकर कॉल काट दिया। इस पूरे मामले को देखते हुए लगता है कि संभाग के सबसे बडे चिकित्सालय में पूरा पोपाबाई का राज चल रहा है जहां रोगियों और उनके परिजनों की कोई सुनवाई करने वाला है। रोगी और उसे लेकर चिकित्सालय आने वाले इलाज के लिए पहुंचते हैं जो पहले से ही परेशान होते है और यहां चिकित्सालय में उन्हें सुनने और राहत देने के बजाय परेशाने यानी कोड में खाज वाली हरकत करते है। चिकित्सालय के चिकित्साकर्मियों और कर्मचारियों, संविदाकर्मियों का रोगियों और उनके परिजनों के सााि इस तरह की अर्भ्रदता को देखते हुए शहर के जनप्रतिनिधियों को अवश्य देखना चाहिए कि उनके होते हुए उनके क्षेत्र में क्या हो रहा है।

By Udaipurviews

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