साइबर जागरूकता ही डिजिटल सुरक्षा का सबसे बड़ा माध्यम – प्रो. सारंगदेवोत

विद्यापीठ विधि महाविद्यालय – ग्रामीण विधिक सहायता शिविर का हुआ आयोजन
नुक्कड नाटक से बढ़ते साइबर क्राइम के खतरे के प्रति ग्रामीण महिलाओं को किया जागरूक
उदयपुर 13 मई / साइबर क्राइम के बढते खतरे के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से  राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संघटक विधि विभाग की ओर से संस्थान के साकरोदा सेंटर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए विधिक सहायता शिविर का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्यॉ में ग्रामीण महिलाओं ने शिरकत की। शिविर का शुभारंभ कुलाधिपति कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर, कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत, प्राचार्य डॉ. कला मुणेत, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट जितेन्द्र जैन, उपाध्यक्ष एडवोकेट लोकेश गुर्जर, महेन्द्र मेनारिया, डॉ. मीता चौधरी ने मॉ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजली एवं दीप प्रज्जवलित कर किया। उत्कृष्ट विद्यार्थियों का अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्हृ देकर सम्मानित किया गया।

कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता एवं सतर्कता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन थोड़ी सी असावधानी आर्थिक और सामाजिक नुकसान का कारण बन सकती है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी या पासवर्ड साझा न करें तथा किसी भी संदिग्ध लिंक या वेबसाइट पर अपनी निजी जानकारी अपलोड करने से बचें।

उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में प्रत्येक व्यक्ति को साइबर सुरक्षा की मूलभूत जानकारी होना आवश्यक है। विधि विद्यार्थियों द्वारा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से साइबर ठगी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया फ्रॉड एवं ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे विषयों को सरल तरीके से प्रस्तुत करना सराहनीय प्रयास है। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को आत्मरक्षा के प्रति भी सजग बनाते हैं।

कुलाधिपति कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है, ऐसे में साइबर सुरक्षा की जानकारी देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ डिजिटल रूप से जागरूक बनाना भी जरूरी है ताकि वे किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी या भ्रमित करने वाली गतिविधियों का शिकार न हों।
उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विधि विभाग द्वारा आयोजित यह शिविर सामाजिक दायित्व, कानूनी शिक्षा और जनजागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण समाज में कानूनी जानकारी और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए इस प्रकार के शिविर निरंतर आयोजित होने चाहिए ताकि लोग अपने अधिकारों के प्रति सजग होने के साथ-साथ साइबर अपराधों से भी सुरक्षित रह सकें।

बार अध्यक्ष जितेन्द्र जैन ने वर्तमान में हो रहे साइबर क्राइम से ग्रामीण महिलाओं को जागरूक किया एवं उसके बचाव के उपाय बताये।

प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हए प्राचार्य डॉ. कला मुणेत ने बताया कि विधि विद्यार्थियों ने नाटक के माध्यम से साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे, ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया धोखाधड़ी तथा डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी गई।

संचालन डॉ. रित्वि धाकड ने किया जबकि आभार डॉ. प्रतीक जांगीण ने जताया।

By Udaipurviews

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