त्याग, तपस्या और समर्पण का प्रतीक है नर्सिंग पेशा – प्रो. सारंगदेवोत
अंतरराष्ट्रीय नर्सेज दिवस पर उत्कृष्ट विद्यार्थियों का सम्मान
उदयपुर, 12 मई / अंतरराष्ट्रीय नर्सेज दिवस के अवसर पर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के संघटक नर्सिंग विभाग द्वारा मंगलवार को “हमारे नर्स, हमारा भविष्य: सशक्त नर्स जीवन बचाते हैं” थीम पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नर्सिंग विद्यार्थियों ने कैंडल जलाकर मानव सेवा, करुणा और बिना किसी भेदभाव के मरीजों की सेवा करने की शपथ ली। साथ ही नुक्कड़ नाटक के माध्यम से “बेटी बचाओदृबेटी पढ़ाओ” का सामाजिक संदेश देकर उपस्थितजनों को जागरूक किया।
समारोह का शुभारंभ कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर, प्राचार्य डॉ. मोहसिन छीपा, मुकेश चौधरी ने आधुनिक नर्सिंग सेवा की जनक फ्लोरेंस नाइटिंगेल के चित्र पर माल्यार्पण एवं मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई, जिसके बाद विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। परिसर में विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई रंगोली एवं स्वास्थ्य जागरूकता आधारित मॉडल प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही।
प्राचार्य डॉ. मोहसिन छीपा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि नर्सिंग केवल एक रोजगार नहीं बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से विद्यार्थियों में सेवा भावना, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय नर्सेज दिवस 2026 की थीम “हमारे नर्स, हमारा भविष्य: सशक्त नर्स जीवन बचाते हैं” को वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि यह थीम नर्सिंगकर्मियों की भूमिका को केवल मरीजों की देखभाल तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें समाज की स्वास्थ्य सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी के रूप में स्थापित करती है। उन्होंने कहा कि एक सशक्त, प्रशिक्षित और संवेदनशील नर्स ही स्वस्थ समाज की आधारशिला होती है। नर्सिंग त्याग, तपस्या और समर्पण का पेशा है, जहां सेवा ही सबसे बड़ा धर्म माना जाता है।
प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि मरीज का आधा उपचार नर्सिंगकर्मी के व्यवहार, आत्मीयता और सकारात्मक संवाद से ही हो जाता है। रोगी डॉक्टर से अधिक समय नर्सिंगकर्मियों के साथ बिताता है, इसलिए उसके मनोबल को मजबूत करने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग पेशा कला और विज्ञान का अद्भुत संगम है, जिसमें एक ओर तकनीकी दक्षता आवश्यक है तो दूसरी ओर मानवीय संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। केवल दवा से मरीज पूर्ण स्वस्थ नहीं हो सकता, उसके लिए सेवा, सहानुभूति और मानवीय स्पर्श भी आवश्यक
नर्सेज दिवस नर्सिंगकर्मियों के सेवाभाव को नमन करने दिन – भंवर लाल गुर्जर
अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नर्सेज दिवस नर्सिंगकर्मियों के सेवाभाव को नमन करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जब संक्रमित व्यक्ति अपने परिवार से दूर था, तब नर्सिंगकर्मी ही उसका सबसे बड़ा सहारा बने। उन्होंने बिना किसी जाति, धर्म और भेदभाव के मानवता की मिसाल प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को उपरणा एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन मानस गहलोत एवं शिवानी नागदा ने किया, जबकि आभार डॉ. मोहसिन छीपा ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर गौरव सनाढ्य, गौरव कुमार, दीनदयाल सिंह, धर्मेन्द्र सिंह चौहान, प्रशांत श्रीमाली, डॉ. नेहा मांडावत, डॉ. जिगिसा मुर्डिया, पारस आडरा, प्रियंका दायमा सहित बड़ी संख्या में अकादमिक एवं गैर अकादमिक कर्मचारी तथा नर्सिंग विद्यार्थी उपस्थित रहे।
